नारायणपुर : छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के खिलाफ एक और बड़ी सफलता हासिल की है। आईटीबीपी (ITBP) की 29वीं बटालियन और स्थानीय पुलिस के संयुक्त अभियान में नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए हथियारों, विस्फोटकों और गोला-बारूद का भारी जखीरा बरामद किया गया है।
धनोरा-ओरछा क्षेत्र में चला विशेष सर्च ऑपरेशन
सुरक्षा बलों को ओरछा से लगभग 30 किलोमीटर दूर गोमाकाल और खोड़पार के जंगलों में नक्सली गतिविधियों की सूचना मिली थी। इसके बाद आईटीबीपी की 29वीं वाहिनी की “E” कंपनी ने छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ मिलकर एक रणनीतिक ऑपरेशन शुरू किया। इस टीम में कमांडेंट दुष्यंत राज जायसवाल और सेकेंड इन कमांड दीपक सेमल्टी के नेतृत्व में कुल 58 जवान शामिल थे।
गुफाओं में छिपाकर रखा था मौत का सामान
सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों ने पाया कि नक्सलियों ने पत्थरों के बीच बनी गुफानुमा जगहों पर हथियारों की खेप छिपा रखी थी। सुरक्षा बलों ने मौके से निम्नलिखित सामग्री बरामद की है:
हथियार: थ्री-नॉट-थ्री (.303) बंदूक, भरमार बंदूक और रॉकेट लॉन्चर।
विस्फोटक: बीजीएल (BGL) सेल, यूबीजीएल (UBGL) सेल, बड़ी संख्या में कटर, तार के बंडल और अन्य विस्फोटक सामग्री।
गोला-बारूद: मैगजीन और जिंदा कारतूस।
अन्य सामग्री: दैनिक उपयोग की वस्तुएं और युद्ध के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली सुरक्षा सामग्री।
31 मार्च 2026 तक ‘नक्सल-मुक्त बस्तर’ का लक्ष्य
सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नक्सलियों के ठिकानों को नष्ट करना और इलाके में सुरक्षा का माहौल बनाना है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक बस्तर को पूरी तरह से नक्सल-मुक्त करने का लक्ष्य रखा है, जिसके तहत अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में गश्त और सर्च ऑपरेशन तेज कर दिए गए हैं।
ग्रामीणों में विश्वास जगाने की कोशिश
ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने ग्रामीणों से भी संवाद किया ताकि विकास कार्यों और शांति व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास कायम किया जा सके। राहत की बात यह रही कि इस पूरे सर्च ऑपरेशन के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और सभी जवान सुरक्षित वापस मुख्यालय लौट आए।
अबूझमाड़ के जंगलों में लगातार हो रही इस तरह की कार्रवाइयों से नक्सलियों के सप्लाई नेटवर्क और मारक क्षमता पर गहरी चोट पहुंची है।







