सुकमा/तेलंगाना। छत्तीसगढ़ के नक्सल मोर्चे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। माओवादी संगठन की रीढ़ माने जाने वाले और 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली कमांडर बारसे देवा ने अपने लगभग 15 साथियों के साथ तेलंगाना में सरेंडर [Surrender – आत्मसमर्पण या पुलिस के आगे हार मान लेना] कर दिया है। खूंखार नक्सली हिड़मा के मारे जाने के बाद बारसे देवा को संगठन का सबसे पावरफुल चेहरा माना जा रहा था। सूत्रों के मुताबिक, एनकाउंटर [Encounter – पुलिस और अपराधियों के बीच होने वाली मुठभेड़] के डर से देवा नेशनल पार्क इलाके से भागकर तेलंगाना पहुंचा और वहां के डीजीपी (DGP) के सामने घुटने टेक दिए।
हिड़मा का करीबी और हथियारों का मास्टरमाइंड
बारसे देवा कोई मामूली नक्सली नहीं है। वह सुकमा जिले के उसी पूवर्ती गांव का रहने वाला है, जहां का खूंखार हिड़मा था। 48 साल का देवा नक्सली संगठन में एसजेडसीएम (SZCM) [Special Zonal Committee Member – संगठन का एक बहुत बड़ा पद] कैडर का अधिकारी था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरेंडर के वक्त उसके पास माउंटेन एलएमजी (LMG) [Light Machine Gun – एक बहुत घातक ऑटोमैटिक बंदूक] जैसा खतरनाक हथियार था। वह नक्सलियों की सबसे घातक मानी जाने वाली ‘बटालियन नंबर 1’ का प्रभारी था और पूरे संगठन को हथियारों की सप्लाई करने का जिम्मा उसी के पास था।
क्यों टूटा माओवादियों का गुरूर?
जानकारों का कहना है कि बस्तर में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और बड़े लीडर्स के खात्मे के बाद नक्सली संगठन पूरी तरह बिखर चुका है। देवा को डर था कि अगर वह छत्तीसगढ़ में रहा तो मारा जाएगा, इसलिए उसने सरेंडर के लिए पड़ोसी राज्य तेलंगाना को चुना। वह संगठन में ‘हेमला देवल’ और ‘देवन्ना’ जैसे कई नामों से जाना जाता था। उसका जाना माओवादी सैन्य टुकड़ियों के लिए एक ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं लगती।
शांति की ओर बढ़ते कदम और ‘बड़ा विजन’
यह कामयाबी सरकार के ‘नक्सल मुक्त बस्तर’ के विजन को मजबूती देती है। सरकार की पुनर्वास नीति (Surrender Policy) के तहत नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया जा रहा है। देवा का सरेंडर करना यह साबित करता है कि अब बड़े कैडर के नक्सलियों का भी हिंसा से मोहभंग हो रहा है। यह बस्तर में विकास और शांति की नई इबारत लिखने जैसा है।
अधिकारियों का क्या है कहना?
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। बस्तर रेंज के आईजी (IG) सुंदरराज पी ने कहा—
“मामला पड़ोसी राज्य तेलंगाना का है, इसलिए हम वहां की पुलिस के साथ लगातार कॉर्डिनेट [Coordinate – तालमेल बिठाना] कर रहे हैं। जल्द ही आधिकारिक पुष्टि के बाद स्थिति और साफ होगी।” माना जा रहा है कि तेलंगाना पुलिस जल्द ही देवा और उसके 15 साथियों को मीडिया के सामने पेश कर सकती है।








