रायपुर: सोमवार को रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ और पहले ही दिन एक बवाल चीज़ पेश हुई। नाम है “छत्तीसगढ़ अंजोर 2047″। ‘अंजोर’ का मतलब होता है रोशनी, और सरकार का दावा है कि ये प्लान अगले 25 सालों तक राज्य में तरक्की की रोशनी फैला देगा। हालांकि, विपक्ष ने इस पर बहस से किनारा कर लिया, लेकिन सदन में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इस मेगा विज़न डॉक्यूमेंट की पूरी डिटेल खोलकर रख दी। उन्होंने साफ कहा कि ये सिर्फ एक सरकारी डॉक्यूमेंट नहीं है, बल्कि 2047 तक छत्तीसगढ़ को समृद्ध, आत्मनिर्भर और सबके लिए समान विकास की राह पर ले जाने का पक्का इरादा है।
आखिर क्यों ये 25 साल का प्लान बनाना पड़ा?
वित्त मंत्री चौधरी ने समझाया कि देखिए, बात सिर्फ आज की नहीं है, बल्कि 25 साल आगे की है। जब हमारा देश 2047 में अपनी आजादी के 100 साल मना रहा होगा, तब छत्तीसगढ़ कहां खड़ा होगा, ये प्लान इसी को ध्यान में रखकर बना है। आजकल दुनिया और देश बहुत तेज़ी से बदल रहे हैं। पॉपुलेशन [जनसंख्या] बढ़ रही है, लोग शहरों की तरफ जा रहे हैं (शहरीकरण), टेक्नोलॉजी [तकनीक] हर दिन नई हो रही है, और हमारे युवाओं की आकांक्षाएं [इच्छाएं] भी आसमान छू रही हैं। इन सब चीज़ों को देखते हुए, अगर हमने अभी कोई दूरदर्शी (दूर की सोचने वाली) और प्लानिंग के साथ बनाई गई पॉलिसी नहीं बनाई, तो हम पीछे रह जाएंगे। इसलिए ये प्लान एक तरह से ‘टाइम मशीन’ की तरह काम करेगा, जो हमें सही दिशा में रखेगा।
विजन का मेन मकसद: क्या-क्या बदलेगा?
‘अंजोर 2047’ का मेन ऑब्जेक्टिव [मुख्य उद्देश्य] एकदम क्लियर है। सरकार चाहती है कि:
आर्थिक विकास को सुपरस्पीड मिले।
युवाओं को बढ़िया एजुकेशन [शिक्षा] और 100% जॉब सिक्योरिटी [रोजगार] मिले।
किसान, मजदूर और आदिवासी समाज को भी डेवलपमेंट [विकास] की मेन स्ट्रीम [मुख्यधारा] में लाया जाए।
इंडस्ट्री [उद्योग] भी बढ़े, लेकिन पर्यावरण को नुकसान न हो (हरित विकास)।
सरकारी काम-काज एकदम साफ-सुथरा (पारदर्शिता) हो और सब कुछ डिजिटल गवर्नेंस के ज़रिए हो।
विकास के 7 ‘पिलर’, जिन पर टिका है ये पूरा प्लान
वित्त मंत्री ने बताया कि इस विज़न डॉक्यूमेंट को 7 बड़े ‘पिलर्स’ [स्तंभों] पर खड़ा किया गया है। ये पिलर ही तय करेंगे कि राज्य कैसे आगे बढ़ेगा:
कृषि और गांव की इकोनॉमी [अर्थव्यवस्था] को ताक़त देना।
इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट [औद्योगिक निवेश] लाना और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना।
एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट [कौशल विकास] पर ज़ोर।
हेल्थ फैसिलिटीज़ [स्वास्थ्य सुविधाएं] का विस्तार।
महिला सशक्तिकरण (महिलाओं को ताक़त देना)।
इंफ्रास्ट्रक्चर [बुनियादी ढांचा] यानी सड़क, बिजली, पानी का ज़बरदस्त विकास।
हरित विकास (पर्यावरण को बचाते हुए विकास)।
चौधरी ने एक खास बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास युवाओं की बहुत बड़ी ताक़त है, जिसे इकोनॉमी की भाषा में “डेमोग्राफिक डिविडेंड” कहा जाता है। इस प्लान का सबसे बड़ा टारगेट यही है कि इस युवा ताक़त को सही शिक्षा और स्किल देकर राज्य की सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया जाए।
ये ‘सरकारी’ प्लान नहीं, ये ‘जनता’ का प्लान है
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने आखिर में साफ किया कि ये विज़न डॉक्यूमेंट सिर्फ़ एसी कमरों में बैठकर नहीं बना है। इसे बनाने में एक्सपर्ट्स [विशेषज्ञों], बड़े नीति निर्माताओं, नेताओं और सबसे ज़रूरी, आम नागरिकों के सुझावों को शामिल किया गया है। उन्होंने वादा किया कि इसे लागू करने में भी जनता की भागीदारी (जनभागीदारी) सबसे ऊपर रहेगी और इसकी रेगुलर चेकिंग [नियमित समीक्षा] होती रहेगी। सरकार का टारगेट एकदम फिक्स है- इस प्लान को ज़मीन पर उतारना और छत्तीसगढ़ को देश के विकसित राज्यों की लाइन में खड़ा करना। ये हमारे आने वाली पीढ़ियों के फ्यूचर का डॉक्यूमेंट है।








