रायपुर: छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीति का पारा सातवें आसमान पर है। गृहमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों को ‘नौटंकी’ करार देते हुए सीधा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में रह रहे अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट से हर हाल में हटाए जाएंगे।
विजय शर्मा का तगड़ा पलटवार: “आका को खुश करने की कोशिश”
गृहमंत्री ने कांग्रेस के तहसील कार्यालय घेराव पर तंज कसते हुए कहा कि यह सब केवल अपने ‘आका’ राहुल गांधी को दिखाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी का नाम कटवाना इतना आसान है? विजय शर्मा ने साफ किया:
आधार क्या है? केवल उन लोगों के नाम कट रहे हैं जिनका 2003 का बेस रिकॉर्ड [Base Record – आधार दस्तावेज] नहीं मिल रहा है।
भ्रम फैलाने का आरोप: कांग्रेस जानबूझकर लोगों के बीच गलत जानकारी फैला रही है।
SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) क्या है?
SIR यानी ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ [Special Intensive Revision – विशेष गहन पुनरीक्षण] चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसके तहत:
घर-घर जाकर वेरिफिकेशन: बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर वोटरों की नागरिकता और पते की जांच कर रहे हैं।
2003 का डेटा: इसमें 2003 के डेटा से मिलान किया जा रहा है ताकि फर्जी या बाहरी मतदाताओं की पहचान की जा सके।
पारदर्शिता: चुनाव आयोग का कहना है कि यह पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी वैध नागरिक का नाम नहीं कटेगा।
रायपुर में बवाल: जेल पहुंचे कांग्रेसी नेता
मंगलवार को रायपुर तहसील कार्यालय में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान भारी हंगामा हुआ। पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद कई नेताओं को गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
दीपक बैज का रुख: पीसीसी (PCC) अध्यक्ष दीपक बैज ने देर रात जेल जाकर कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक द्वेष [Political Malice – राजनीति से प्रेरित दुश्मनी] के चलते कांग्रेस समर्थकों के नाम कटवा रही है।
लोकतंत्र की हत्या: बैज ने प्रशासन की इस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा
भाजपा इसे ‘शुद्धिकरण’ बता रही है ताकि कोई भी विदेशी घुसपैठिया राज्य की राजनीति को प्रभावित न कर सके। वहीं, कांग्रेस का दावा है कि ‘2003 के रिकॉर्ड’ का बहाना बनाकर उनके वोट बैंक को निशाना बनाया जा रहा है।
इस पूरे मामले ने राज्य में एक बार फिर ‘स्थानीय बनाम बाहरी’ की बहस को छेड़ दिया है।







