रायपुर में शनिवार को छत्तीसगढ़ की राजनीति उस वक्त फिर चर्चा में आ गई, जब शराब घोटाले से जुड़े मामलों में जमानत मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल सेंट्रल जेल से रिहा हुए। वह करीब साढ़े पांच महीने से ज्यादा समय से न्यायिक हिरासत में थे।
हाईकोर्ट से जमानत मिलने के एक दिन बाद हुई इस रिहाई को कांग्रेस जहां न्याय की जीत बता रही है, वहीं पूरा घटनाक्रम राजनीतिक सवाल भी खड़े कर रहा है।
जमानत किस मामले में मिली?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शुक्रवार को चैतन्य बघेल की दो जमानत याचिकाएं मंजूर कीं।
एक मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का है और दूसरा छत्तीसगढ़ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज किया गया है।
इन दोनों मामलों में जमानत मिलने के बाद शनिवार को उनकी रिहाई हुई।
गिरफ्तारी कब और कैसे हुई?
चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को ईडी ने कथित शराब घोटाले की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से वह न्यायिक हिरासत में थे और रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले की जांच से जुड़ा हुआ है।
जेल के बाहर क्या माहौल रहा?
रिहाई के वक्त जेल के बाहर कांग्रेस नेताओं और समर्थकों की बड़ी संख्या मौजूद थी। समर्थकों ने नारे लगाए, पार्टी के झंडे लहराए और ढोल भी बजाए गए। जेल से बाहर आने के बाद चैतन्य बघेल ने अपने पिता भूपेश बघेल के पैर छुए और उन्हें गले लगाया। इसके बाद वह गाड़ी में बैठकर रवाना हुए।
रिहाई के बाद चैतन्य ने क्या कहा?
गाड़ी से बाहर निकलते समय चैतन्य बघेल ने समर्थकों की ओर हाथ हिलाकर अभिवादन किया और कांग्रेस का झंडा भी लहराया। उन्होंने कहा,
‘‘न्याय में देरी हुई, लेकिन न्याय मिला है। मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं। मुझे संविधान पर भरोसा है।’’
उन्होंने यह भी कहा कि मामला अदालत में होने के कारण वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
भूपेश बघेल ने किसे घेरा?
अपने बेटे की रिहाई पर भूपेश बघेल ने इसे ‘‘सरकार द्वारा प्रायोजित साजिशों’’ के खिलाफ जीत बताया।
उन्होंने दावा किया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूरे राज्य में खुशी का माहौल है और कई जिलों से पार्टी कार्यकर्ता रायपुर पहुंचे हैं। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया,
‘एक साजिश के तहत ईडी ने 18 जुलाई को चैतन्य को उनके जन्मदिन पर गिरफ्तार किया था और उनकी रिहाई बेटे के जन्मदिन पर हुई।’
केंद्रीय एजेंसियों पर क्या आरोप?
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि ईडी, आयकर विभाग, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
यह बयान आने के बाद मामला कानूनी दायरे से निकलकर सियासी बहस में और गहराता दिख रहा है।
अब आगे सवाल क्या है?
हाईकोर्ट से जमानत के बाद चैतन्य बघेल जेल से बाहर आ चुके हैं, लेकिन शराब घोटाले से जुड़े मामले अभी अदालत में हैं।
अब सवाल यह है कि कानूनी प्रक्रिया आगे किस दिशा में जाएगी और इस पूरे घटनाक्रम का छत्तीसगढ़ की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? ये सब अभी देखने वाली बात होगी।








