जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में महाशिवरात्रि पर्व को लेकर भक्ति का सैलाब उमड़ने को तैयार है। जिले के तीन प्रमुख शिवालयों—खरौद के लक्ष्मणेश्वर महादेव, नवागढ़ के लिंगेश्वर महादेव और पीथमपुर के कलेश्वर नाथ मंदिर में विशेष तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इन मंदिरों की अपनी अनोखी मान्यताएं और पौराणिक इतिहास है।
1. खरौद: रामायण कालीन ‘लाख छिद्र’ वाला शिवलिंग
शिवरीनारायण के समीप स्थित खरौद को ‘छत्तीसगढ़ की काशी’ कहा जाता है। यहाँ स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर का संबंध त्रेतायुग से है।
अक्षय कुंड: शिवलिंग में एक लाख छोटे-छोटे छिद्र हैं। मान्यता है कि इनमें अर्पित किया गया जल कभी कम नहीं होता, इसलिए इसे अक्षय कुंड भी कहते हैं।
परंपरा: यहाँ भगवान शिव को सवा लाख चावल चढ़ाने की अनूठी परंपरा है।
मान्यता: कहा जाता है कि लक्ष्मण जी ने रावण वध (ब्रह्महत्या) के पाप से मुक्ति पाने के लिए यहाँ पूजा की थी। यहाँ दर्शन मात्र से क्षय रोग (टीबी) से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
2. नवागढ़: बढ़ती ऊंचाई वाला स्वयंभू ‘लिंगेश्वर महादेव’
नवागढ़ का लिंगेश्वर महादेव मंदिर अपनी रहस्यमयी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है।
बढ़ता आकार: यह एक स्वयंभू शिवलिंग है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसकी ऊंचाई हर साल बढ़ रही है।
अनंत गहराई: शोधकर्ताओं ने इसकी गहराई नापने की कोशिश की, लेकिन आज तक इसके मूल छोर का पता नहीं चल सका है।
आस्था: यहाँ श्रद्धालु मुख्य रूप से वंश वृद्धि और संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर पहुँचते हैं।
3. पीथमपुर: उदर रोगों का नाश करते हैं ‘कलेश्वर नाथ’
हसदेव नदी के तट पर स्थित कलेश्वर नाथ मंदिर की कहानी चांपा के जमींदार से जुड़ी है।
चमत्कारी इलाज: मान्यता है कि चांपा के जमींदार के पेट की लाइलाज बीमारी शिव जी के स्वप्न में बताए स्थान पर शिवलिंग की पूजा करने से ठीक हुई थी। तब से यहाँ उदर (पेट) रोगों से मुक्ति के लिए लोग दर्शन करने आते हैं।
विशेष आयोजन: यहाँ महाशिवरात्रि के अलावा रंगपंचमी पर भव्य आयोजन होता है। चांदी की पालकी में पंचमुखी शिव जी की बारात निकलती है, जिसमें नागा साधु और देश-विदेश के श्रद्धालु शामिल होते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था
महाशिवरात्रि पर उमड़ने वाली लाखों की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा, पेयजल और सुगम दर्शन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। हसदेव नदी के घाटों पर भी विशेष सफाई अभियान चलाया गया है ताकि स्नान के बाद भक्त सीधे जल अभिषेक कर सकें।








