धमतरी : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर धमतरी शहर में भगवान भोलेनाथ की भव्य बारात निकाली गई। विंध्यवासिनी मंदिर से शुरू हुई यह बारात जब नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरी, तो पूरा वातावरण ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष और शंखनाद से भक्तिमय हो गया। बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट और बोलबम कांवरिया संघ द्वारा आयोजित इस ऐतिहासिक बारात में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
विविधता और संस्कृति का अनूठा संगम
इस वर्ष की बारात में देशभर की प्रसिद्ध झांकियां और मंडलियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। भक्तों ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य किया और बाबा की पालकी का जगह-जगह पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया।
बारात के मुख्य आकर्षण:
अघोरी और साधु: बालाघाट के अघोरी और सोन अघोरियों के दल ने अपने रौद्र और भक्तिपूर्ण प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा।
सांस्कृतिक मंडलियां: कोंडागांव का प्रसिद्ध राउत नाचा, नागपुर की काली मां की झांकी और ओडिशा से आए ‘कटप्पा’ की प्रस्तुति ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
वाद्य यंत्र: बनारस के डमरू दल, जालमपुर के धुमाल और ताशे-मंजीरों की गूंज ने बारात में उत्साह भर दिया।
अनोखी पहल: स्केटिंग पहनकर रंगोली बनाने वाले कलाकारों और किन्नरों के पारंपरिक नृत्य ने भी बारात की भव्यता बढ़ाई।
1400 साल पुरानी परंपरा और बनारस की तर्ज पर पालकी
श्री बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विपिन पवार ने बताया कि यह मंदिर 14वीं सदी पुराना (लगभग 1400 साल) है और यहाँ की आस्था अद्वितीय है। इस बार बारात में बनारस की तर्ज पर भव्य पालकी यात्रा निकाली गई, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की रस्मों को जीवंत किया गया।
पांच दिवसीय महोत्सव का चरमोत्कर्ष
यह बारात मंदिर में चल रहे पांच दिवसीय शिव विवाह महोत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। हल्दी, मेहंदी और मंगल गीतों के बाद आयोजित इस बारात का समापन इतवारी बाजार स्थित बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर में हुआ। भक्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्थानीय संगठनों द्वारा जगह-जगह स्वागत स्टॉल और जलपान की व्यवस्था की गई थी।
धमतरी की सड़कों पर उमड़ा यह सैलाब न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि शहर की सामाजिक समरसता को भी दर्शाता है।







