रायपुर/ सक्ती: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की समय-सीमा खत्म होने के करीब है, लेकिन जमीनी हालात तनावपूर्ण नजर आ रहे हैं। सक्ती जिले में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है और वे सड़कों पर उतर आए हैं। इस मुद्दे को लेकर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार की घेराबंदी करते हुए इसे “किसानों के साथ बड़ा अन्याय” बताया है।
दावे और हकीकत में भारी अंतर
डॉ. महंत का आरोप है कि सरकार “एक-एक दाना धान खरीदने” का वादा तो कर रही है, लेकिन हकीकत में अफरा-तफरी [Chaos – अव्यवस्था] मची हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को पहले ही आगाह किया गया था कि तय समय में खरीदी पूरी नहीं हो पाएगी, फिर भी तारीख नहीं बढ़ाई गई।
टोकन होने के बाद भी कटौती का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने धान खरीदी केंद्रों की अव्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं:
कटौती: आरोप है कि जिन किसानों के पास टोकन [Token – धान बेचने के लिए मिला नंबर/पर्ची] है, उनका भी पूरा धान नहीं लिया जा रहा। कहीं 40% तो कहीं आधा धान ही खरीदा जा रहा है।
इनकार: कई केंद्रों पर टोकन होने के बावजूद धान लेने से साफ मना किया जा रहा है, जिससे किसान परेशान हैं।
सक्ती जिले के आंकड़ों से घेरा
महंत ने सक्ती जिले के सरकारी आंकड़े पेश करते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया:
पंजीकृत किसान: 91,526
लक्ष्य: 5.31 लाख मीट्रिक टन [Metric Ton – वजन मापने की इकाई]।
अब तक खरीदी: केवल 4.33 लाख मीट्रिक टन।
सवाल: 31 जनवरी की डेडलाइन [Deadline – अंतिम तारीख] तक बचा हुआ करीब 1 लाख टन धान कैसे खरीदा जाएगा?
राजभवन पहुंचा मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. महंत ने राज्यपाल को पत्र लिखकर हस्तक्षेप [Intervention – दखल देना] करने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि:
टोकन वाले हर किसान का पूरा धान खरीदा जाए।
जिन जिलों में काम बाकी है, वहां खरीदी की तारीख बढ़ाई जाए।
किसानों को मंडियों में परेशान न किया जाए।
विपक्ष का कड़ा रुख
डॉ. महंत ने साफ कर दिया है कि अगर किसानों को उनका हक नहीं मिला, तो यह मुद्दा सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर सकता है। सक्ती में किसानों की हड़ताल और चक्काजाम [Traffic Block – रास्ता रोकना] इसी
आक्रोश का नतीजा है।







