रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में आरोपी बनाए गए कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने लखमा की जमानत याचिका मंजूर कर ली, जिसके बाद अब उनकी जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
ED और EOW दोनों मामलों में मिली राहत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कवासी लखमा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और ईओडब्ल्यू-एसीबी (EOW-ACB) द्वारा दर्ज किए गए दोनों ही मामलों में जमानत दे दी है। लंबे समय से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद लखमा अब कागजी कार्यवाही पूरी होने के बाद अगले एक-दो दिन में बाहर आ सकते हैं।
भूपेश बघेल ने बताया ‘बड़ा षड्यंत्र’
लखमा को जमानत मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने दावा किया कि लखमा को एक उद्योगपति को फायदा पहुंचाने के लिए षड्यंत्रपूर्वक [साजिश के तहत] जेल में डाला गया था। बघेल ने इसे ‘सत्य की जीत’ बताया है।
कांग्रेस का तीखा हमला: ‘राजनीतिक विद्वेष का शिकार’
कांग्रेस के प्रदेश संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों ने राजनीतिक विद्वेष [दुश्मनी की भावना] के चलते एक बड़े आदिवासी नेता को महीनों जेल में रखा। उन्होंने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन कभी पराजित नहीं होता।
क्या था पूरा मामला और ED के आरोप?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ED ने दिसंबर 2024 में लखमा के ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच एजेंसी का आरोप था कि लखमा ने शराब घोटाले से करीब 72 करोड़ रुपये जुटाए और उसी पैसे से उनके बेटे ने आलीशान मकान बनवाया। हालांकि, लखमा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।
गिरफ्तारी से लेकर अब तक का घटनाक्रम
15 जनवरी 2025: प्रवर्तन निदेशालय ने कवासी लखमा को गिरफ्तार किया।
21 जनवरी 2025: पूछताछ के बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
हाईकोर्ट से झटका: इससे पहले हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता देखते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
3 फरवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने दोनों मामलों में जमानत याचिका स्वीकार की।
बस्तर के ‘अजेय’ योद्धा हैं लखमा
कवासी लखमा बस्तर की कोंटा सीट से लगातार 6 बार के विधायक हैं। वे 2013 के दरभा घाटी नक्सली हमले में जीवित बचे चुनिंदा नेताओं में से एक हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस के कई दिग्गज मंत्री चुनाव हार गए थे, तब भी लखमा अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे थे।













