छत्तीसगढ़ में सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता पर अब कोई ढील नहीं होगी ऐसा डिप्टी सीएम अरुण साव के दिए बयान का निचोड़ समझ आता है। उन्होंने विष्णुदेव साय सरकार के दो साल का लेखा-जोखा पेश करते हुए साफ कहा, उन्होंने यह भी कहा कि सड़क बनेगी तो उसकी क्वालिटी चेक, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और मैदानी निरीक्षण तीनों होंगे।
‘नो-कम्प्रोमाइज’ मॉडल: सड़क से सरकार तक निगरानी
डिप्टी सीएम अरुण साव के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में सड़कों की गुणवत्ता पर किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।इसके लिए सड़क से लेकर सरकार तक निगरानी की व्यवस्था बनाई गई है। हर निर्माण कार्य के लिए जिम्मेदार पदाधिकारी (अधिकारी) तय किए गए हैं, जो मौके पर जाकर जांच करेंगे और रिपोर्ट देंगे।
ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम एक्टिव
सड़क निर्माण किस तरीके से हो रहा है, उसकी गुणवत्ता रिपोर्ट तैयार होगी। इस पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन मॉनिटरिंग भी की जा रही है, ताकि हर स्तर पर जवाबदेही बनी रहे।
पुल निर्माण में स्पीड बढ़ाने के नियम में बदलाव
डिप्टी सीएम ने बताया कि अब ढाई करोड़ रुपये तक के पुल निर्माण के लिए B श्रेणी के ठेकेदार भी भाग ले सकेंगे। इस बदलाव से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और पुल निर्माण की गति तेज होगी।
नेशनल हाईवे: पैसा केंद्र का, काम राज्य का
नेशनल हाईवे निर्माण में छत्तीसगढ़ सरकार एजेंसी के तौर पर काम करती है। भारत सरकार इसकी स्वीकृति और राशि देती है। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग करता है और NHAI [नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया] इसकी मॉनिटरिंग एजेंसी है।
राज्य की बड़ी योजनाएं
2023-24: 81 कार्य, 550 करोड़ रुपये की स्वीकृति
2024-25: 436 कार्य, 2589 करोड़ रुपये की स्वीकृति
2025-26: 608 नए सड़क, पुल व भवन कार्य, 4950 करोड़ रुपये प्रस्तावित
दिसंबर 2023 के बाद: 1126 कार्यों को 8092 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति
मार्च 2025 से अब तक: 1012 निविदाएं, 4824 करोड़ रुपये की स्वीकृति
दिसंबर 2023 से अब तक: 440 निर्माण कार्यों का लोकार्पण
247 सड़क, 148 भवन, 45 पुल
लोक निर्माण विभाग का दावा: तेज़ी से विकास
अरुण साव के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग छत्तीसगढ़ के विकास में तेजी से काम कर रहा है। सड़कों को विकास की रीढ़ बताते हुए उन्होंने कहा कि हर साल क्या करना है, इसकी कार्य योजना पहले से तय है।
बस्तर पर फोकस: सड़क से जुड़ेगा विकास
बस्तर क्षेत्र में सड़क निर्माण और उन्नयन के लिए 17 बड़े मार्गों पर काम किया जा रहा है। इनमें राजनांदगांव से तेलंगाना बॉर्डर, उड़ीसा बॉर्डर से महाराष्ट्र बॉर्डर और अंदरूनी बस्तर इलाकों
को जोड़ने वाले कई प्रमुख मार्ग शामिल हैं।








