सुकमा : बस्तर के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले की तस्वीर अब तेजी से बदलने लगी है। जिन इलाकों में पहले सिर्फ गोलियों और आईईडी [IED – विस्फोटक उपकरण] धमाकों की आवाज आती थी, वहां अब स्कूल की घंटियां गूंज रही हैं। सुरक्षाबलों के नए कैंप स्थापित होने के बाद बंद पड़े स्कूलों और आश्रमों के ताले दोबारा खुल रहे हैं।
नक्सलियों ने नष्ट कर दिए थे स्कूल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने बताया कि नक्सलियों ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत सैकड़ों स्कूलों और आश्रमों को तबाह कर दिया था। अब प्रशासन उन सभी स्कूलों को फिर से शुरू करने में जुटा है। आईजी का कहना है कि जहां पहले बमों का शोर था, वहां अब बच्चों की पढ़ाई की आवाजें आ रही हैं।
दिसंबर 2024 में कैंप खुलने से बदला माहौल
सुकमा एसपी किरण चव्हाण के मुताबिक, रायगुड़ा जैसे सुदूर इलाकों में दिसंबर 2024 में पुलिस कैंप स्थापित किए गए थे। इसके बाद चलाए गए नक्सल विरोधी अभियानों से स्थिति में बड़ा सुधार आया है। अब न केवल स्कूल, बल्कि स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी और PDS [Public Distribution System – राशन दुकान] जैसी सुविधाएं भी ग्रामीणों तक पहुंच रही हैं।
बिना डर के स्कूल पहुंच रहे छात्र
स्थानीय शिक्षक अर्जुन ने बताया कि अब बच्चे बिना किसी खौफ के स्कूल आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिक्षक का कहना है कि पहले यहां कोई सुविधा नहीं थी और लोग आने से डरते थे। अब स्कूल खुलने से बच्चे अपने माता-पिता और इलाके का नाम रोशन करने का सपना देख रहे हैं।
नियद नेल्लानार योजना से मिल रहा लाभ
पुलिस प्रशासन का दावा है कि ग्रामीण अब सरकार की योजनाओं से जुड़ना चाहते हैं। ‘नियद नेल्लानार’ [Niyad Nellanar – आपका अच्छा गांव] योजना के तहत लोगों के आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं और बुनियादी सुविधाएं दी जा रही हैं। इससे ग्रामीणों और सरकार के बीच का फासला कम हो रहा है।
आजादी की सांस ले रही हैं महिलाएं
गांव की रहने वाली मांडवी सनवैया ने बताया कि पहले नक्सलवाद के कारण लोग एक गांव से दूसरे गांव तक नहीं जा पाते थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा, “CRPF कैंप बनने के बाद अब हम आजादी से सांस ले पा रहे हैं। आने-जाने पर कोई रोक नहीं है।” उन्होंने सरकार से जल्द ही स्कूल बिल्डिंग और अस्पताल बनाने की भी गुहार लगाई है।
सोलर पैनल और बिजली की पहुंच
ग्रामीणों ने बताया कि इलाके में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं और बिजली की लाइनें भी बिछ गई हैं। अब लोगों को बस जल्द ही कनेक्शन मिलने का इंतजार है। ग्रामीण महिला का कहना है कि वे चाहती हैं उनके बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ें।
सुकमा के इन अंदरूनी इलाकों में शिक्षा का दीया जलना इस बात का संकेत है कि बस्तर अब हिंसा के दौर को पीछे छोड़ विकास की ओर बढ़ रहा है। 📝







