बालोद: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के मेड़की गांव से एक अनोखा मामला सामने आया है। गांव की पंचायत और ग्रामीणों ने आपसी विवादों को खत्म करने के लिए ‘चुगली’ करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। अब अगर कोई ग्रामीण दूसरे की बुराई या भड़काऊ बातें करते पाया गया, तो उसे भारी जुर्माना भरना होगा।
विवाद की जड़ बनी ‘चुगली’
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गांव में अक्सर छोटे-छोटे झगड़े चुगली की वजह से बड़े विवाद और मारपीट में बदल रहे थे। हाल ही में दो पक्षों के बीच हुए एक बड़े तनाव की मुख्य वजह भी ‘इधर की बात उधर करना’ पाई गई। इसके बाद गुरुवार को गांव की बैठक में सर्वसम्मति से इस पर रोक लगाने का फैसला लिया गया।
5000 रुपये का भारी दंड
गांव की समिति के पदाधिकारियों ने कड़ा नियम बनाया है। यदि कोई व्यक्ति चुगली करते हुए पकड़ा जाता है या उसके खिलाफ ठोस सबूत मिलते हैं, तो उससे 5000 रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा। पंच प्रतिनिधि विश्वकांत भारद्वाज के मुताबिक, कुछ लोग एक-दूसरे को लड़ाकर मजे लेते हैं, जिससे गांव का माहौल खराब होता है।
नशाखोरी पर भी सख्त एक्शन
चुगली के साथ-साथ गांव में नशे के खिलाफ भी अभियान तेज कर दिया गया है। गांव के कोषाध्यक्ष दिनेश साहू ने बताया कि 5 साल पहले भी नशा मुक्ति को लेकर नियम बनाए गए थे। अब गांव में शराब बेचने वालों पर 10,000 रुपये और सार्वजनिक स्थान पर शराब पीकर हंगामा करने वालों पर 11,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
ग्रामीणों ने किया फैसले का स्वागत
इस अनोखे फैसले को लेकर ग्रामीणों में उत्साह है। ग्रामीण छबील राम साहू और बुजुर्ग भूखन लाल श्रीवास्तव का कहना है कि चौक-चौराहों पर बैठकर होने वाली कानाफूसी बंद होने से गांव में एकता बढ़ेगी। लोग अब गलत काम करने या अफवाह फैलाने से डरेंगे, जिससे गांव में शांति का माहौल बनेगा।
सूचना देने वाले को मिलेगा इनाम
गांव की व्यवस्था को सुधारने के लिए समिति ने ‘रिवॉर्ड सिस्टम’ भी लागू किया है। शराब बेचने वालों की जानकारी देने वाले व्यक्ति को 1,000 रुपये का इनाम दिया जाएगा। ग्रामीणों का मानना है कि इन सख्त नियमों से आपसी भरोसा मजबूत होगा और सोशल मीडिया या अफवाहों के जरिए फैलने वाली गलतफहमियां कम होंगी।
पंचायत के इस फैसले की चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। प्रशासन की नजर इस बात पर है कि यह सामाजिक पहल विवादों को कम करने में कितनी कारगर साबित होती है।














