बालोद : छत्तीसगढ़ के खेती-किसानी के इतिहास में बुधवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। बालोद जिले के मां दंतेश्वरी सहकारी शक्कर कारखाने में प्रदेश की पहली आधुनिक ‘गन्ना क्रॉप हार्वेस्टर’ [G sugarcane Crop Harvester – गन्ना काटने वाली मशीन] का उद्घाटन किया गया। विधि-विधान से पूजा के बाद इसे किसानों के लिए शुरू कर दिया गया है।
मजदूरों की किल्लत से मिलेगी मुक्ति
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गन्ना किसानों को अक्सर कटाई के समय मजदूरों की कमी और महंगी मजदूरी का सामना करना पड़ता था। इस समस्या को खत्म करने के लिए DMF [District Mineral Foundation – जिला खनिज संस्थान न्यास] के सहयोग से करीब डेढ़ करोड़ रुपए की लागत वाली यह मशीन खरीदी गई है। इससे किसानों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
लागत में 30 प्रतिशत तक की गिरावट
बीजेपी जिला महामंत्री और गन्ना किसान राकेश यादव ने दावा किया है कि इस आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से गन्ने की कटाई की लागत में लगभग 30% तक की बड़ी कमी आएगी। वहीं रेड क्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष तोमन साहू ने बताया कि यह मशीन मजदूरों की रेट से काफी कम खर्च पर किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी।
‘पहले आओ-पहले पाओ’ पर मिलेगी सुविधा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मशीन बाहर से मंगवाई गई है और इसने खेतों में काम करना भी शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन और कारखाना प्रबंधन का कहना है कि जो किसान इसका लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें आवेदन करना होगा। ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर और जरूरत को देखते हुए किसानों को मशीन दी जाएगी।
प्रदेश की पहली मशीन और बालोद का नाम
इस नई तकनीक का इस्तेमाल करने वाला बालोद छत्तीसगढ़ का पहला जिला बन गया है। कृषि जानकारों का मानना है कि इस मशीन के आने से न केवल किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि जिले में गन्ना उगाने वाले रकबे [Area – जमीन का क्षेत्र] में भी बढ़ोतरी होने की पूरी उम्मीद है।
तकनीक से बढ़ेगी किसानों की बचत
भाजपा जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख ने कहा कि यह मशीन गन्ना कटाई के क्षेत्र में मील का पत्थर [Milestone – ऐतिहासिक उपलब्धि] साबित होगी। डीजल और मशीनरी का खर्च होने के बाद भी यह हाथ से होने वाली कटाई (मैनुअल लेबर) के मुकाबले काफी सस्ती पड़ेगी।
इस मशीन के आने से अब किसानों को गन्ने की फसल काटने के लिए सीजन में मजदूरों के पीछे भागने की जरूरत नहीं होगी।








