बालोद: बालोद जिले के गन्ना किसानों की किस्मत बदलने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से प्रदेश की पहली गन्ना कटाई हार्वेस्टर मशीन खरीदी गई है। इसका मकसद किसानों की मेहनत कम करना और जिले के इकलौते शक्कर कारखाने को संजीवनी देना है।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बालोद जिले में गन्ना किसानों को कटाई के लिए मजदूर नहीं मिलते थे और लागत [खर्चा] भी बहुत ज्यादा आती थी। इसी समस्या को खत्म करने के लिए लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से यह आधुनिक मशीन मंगवाई गई है।
महाप्रबंधक का बड़ा बयान
मां सियादेवी सहकारी शक्कर कारखाना के महाप्रबंधक लिलेश्वर देवांगन ने बताया कि इस मशीन का किराया मजदूरी से कम रखा जाएगा। उन्होंने कहा, “कोशिश है कि कम समय में कटाई हो ताकि कारखाने में गन्ने की सप्लाई बनी रहे।”
क्यों पड़ी इस मशीन की जरूरत?
जिले में स्थित मां सियादेवी सहकारी शक्कर कारखाना फिलहाल अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहा है। कारखाने को चलाने के लिए 1200 हेक्टेयर [जमीन नापने की इकाई] में गन्ने की फसल चाहिए, लेकिन अभी सिर्फ 700 हेक्टेयर में ही पैदावार हो रही है।
किसानों को होगा बड़ा फायदा
प्रशासन का मानना है कि मशीन आने से किसानों की कटाई की लागत कम होगी और उनका मुनाफा [फायदा] बढ़ेगा। अब तक कुशल मजदूरों की कमी और अधिक खर्च के डर से किसान गन्ना उगाने से बचते थे।
कैसे काम करेगी यह मशीन?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मशीन के कुछ हिस्से जल्द ही पहुंच जाएंगे। इसके बाद किसान आवेदन देकर इसे अपने खेत पर बुलवा सकेंगे। यह मशीन न केवल गन्ना काटेगी, बल्कि उसे ट्रैक्टर में लोड भी करेगी।
मध्य प्रदेश की तर्ज पर बदलाव
छत्तीसगढ़ में यह अपनी तरह की पहली मशीन है, जबकि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में ऐसी तकनीक पहले से इस्तेमाल हो रही है। बालोद जिला प्रशासन को उम्मीद है कि इस तकनीक से किसान गन्ने की खेती के प्रति जागरूक होंगे।












