जबलपुर: रेल यात्रा के दौरान खिड़कियों पर पत्थर और कांच की बोतलें लगने की बढ़ती शिकायतों के बाद रेलवे प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया है। आरपीएफ [Railway Protection Force – रेलवे सुरक्षा बल] ने जबलपुर के शोभापुर फाटक इलाके से 10 बच्चों को रंगे हाथों पकड़ा है, जो मजे के लिए चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकते थे। प्रशासन ने इस गंभीर समस्या को देखते हुए रेलवे लाइन के पास स्थित एक शराब दुकान को भी हटाने की मांग की है, ताकि यात्रियों की जान जोखिम में न पड़े।
शर्त लगाकर ट्रेन को बनाते थे निशाना: 25 मामले आए सामने
बीते कुछ दिनों में शोभापुर फाटक और ओवरब्रिज के पास से गुजरने वाली ट्रेनों पर पत्थरबाजी की करीब 25 घटनाएं दर्ज की गईं। आरपीएफ की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि बच्चे आपस में शर्त लगाते थे कि किसका निशाना ट्रेन की खिड़की या दरवाजे पर सटीक लगता है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि चलती ट्रेन पर फेंका गया पत्थर किसी गोली की तरह काम करता है, जिससे यात्री की जान भी जा सकती है। पकड़े गए बच्चों के माता-पिता को बुलाकर सख्त हिदायत [कड़ी चेतावनी] दी गई है कि अगली बार पकड़े जाने पर सीधा जेल भेजा जाएगा।
शराबियों का आतंक: कांच की बोतलों से टूट रहे ट्रेनों के शीशे
पत्थरबाजी के अलावा दूसरी बड़ी समस्या रेलवे ट्रैक के पास स्थित शराब दुकान है। यहां अक्सर शराबी शराब पीने के बाद खाली बोतलें चलती ट्रेनों पर फेंक देते थे। इसकी वजह से रेलगाड़ियों के शीशे टूट रहे थे और कोच के अंदर बैठे यात्री डर के साए में सफर करने को मजबूर थे। आरपीएफ ने इस इलाके में गश्ती [सुरक्षा के लिए घूमना] बढ़ा दी है ताकि शरारती तत्वों पर नजर रखी जा सके।
जबलपुर जिला प्रशासन को पत्र: दुकान हटाने की तैयारी
रेलवे ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जबलपुर जिला प्रशासन को पत्र लिखकर शोभापुर फाटक के पास की शराब दुकान को तुरंत शिफ्ट [दूसरी जगह हटाना] करने की मांग की है। रेलवे का मानना है कि इस दुकान के हटने से पटरियों के पास असमाजिक तत्वों का जमावड़ा कम होगा और यात्रियों का सफर सुरक्षित हो सकेगा। जिला प्रशासन ने इस पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन [भरोसा] दिया है।
रेलवे का मिशन ‘सुरक्षित सफर’: सुरक्षा विजन पर जोर
यह कार्रवाई भारतीय रेलवे के उस बड़े विजन [मुख्य लक्ष्य] का हिस्सा है, जिसके तहत यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया है। ‘ऑपरेशन सुरक्षित सफर’ के तहत रेलवे ट्रैक के आसपास के संवेदनशील इलाकों को चिन्हित [निशान लगाना] किया जा रहा है, ताकि पत्थरबाजी जैसी घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके। आरपीएफ इंस्पेक्टर राजीव का कहना है: “हमने 10 बच्चों और उनके परिजनों को समझाइश दी है। साथ ही जिला प्रशासन से शराब दुकान हटाने की मांग की है ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित [पक्की] की जा सके।”








