जांजगीर-चांपा: बंद राइस मिल में वन विभाग की बड़ी रेड, 50 लाख की इमारती लकड़ी जब्त
जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में वन विभाग ने इमारती लकड़ी की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम भादा में एक बंद पड़े राइस मिल परिसर में छापेमारी कर विभाग ने भारी मात्रा में अवैध लकड़ी बरामद की है। शुरुआती आकलन के अनुसार, जब्त की गई लकड़ी की कीमत लगभग 50 लाख रुपये बताई जा रही है।
मुखबिर की सूचना पर रायगढ़ फ्लाइंग स्क्वॉड ने मारा छापा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रायगढ़ वन विभाग की उड़नदस्ता (फ्लाइंग स्क्वॉड) टीम को ट्रकों और माजदा वाहनों के जरिए कीमती लकड़ी के अवैध परिवहन की गुप्त सूचना मिली थी। इस जानकारी के आधार पर टीम ने नवागढ़ के भादा गांव स्थित बंद राइस मिल के गोदाम में दबिश दी, जहां अवैध कारोबार का खुलासा हुआ।
15 ट्रक से अधिक तेंदू और खैर की लकड़ी बरामद
छापेमारी के दौरान वन विभाग की टीम को मौके से 15 ट्रक से अधिक कीमती लकड़ी मिली है। इसमें मुख्य रूप से तेंदू और खैर की लकड़ियां शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि टीम के पहुंचने से पहले ही मिल में काम करने वाले कर्मचारी वहां से फरार हो गए थे। वन विभाग ने पूरे परिसर को सील कर दिया है और लकड़ियों की विस्तृत गिनती शुरू कर दी है।
तस्करी की डायरी और रसद बरामद
वन मंडलाधिकारी हिमांशु डोंगरे ने बताया कि राइस मिल परिसर में न केवल लकड़ी का अवैध भंडारण था, बल्कि वहां अवैध आरा मिल का संचालन भी किया जा रहा था। जांच के दौरान टीम को एक डायरी मिली है, जिसमें लकड़ी ढोने वाले वाहनों की आवाजाही का पूरा विवरण दर्ज है। फिलहाल, एक ट्रक और माजदा में लदी लकड़ी को डिपो भेज दिया गया है।
बंदूक की बट और कत्था बनाने में उपयोग
वन अधिकारियों के मुताबिक, जब्त की गई लकड़ियों की बाजार में काफी मांग है।
तेंदू लकड़ी: इसका उपयोग मुख्य रूप से 12 बोर बंदूक की बट (मुट्ठी) बनाने में किया जाता है।
खैर लकड़ी: इससे पान में इस्तेमाल होने वाला कत्था तैयार होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार खैर की लकड़ी को चंदन बताकर भी ऊंचे दामों पर बाहर बेचने की कोशिश की जाती है।
बड़े गिरोह के पर्दाफाश की संभावना
इस कार्रवाई के बाद पुलिस और वन विभाग को उम्मीद है कि जब्त डायरी और फरार कर्मचारियों की तलाश से लकड़ी तस्करी के एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हो सकता है। यह जांच की जा रही है कि बिना अनुमति प्रतिबंधित लकड़ियों का इतना बड़ा जखीरा यहां कब से जमा किया जा रहा था और इसके पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है।












