धमतरी : शहर के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक श्री बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि का महापर्व पूरी आस्था और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। 11 से 15 फरवरी तक चलने वाले इस शिव-विवाह उत्सव में भक्त घराती और बाराती बनकर रस्में निभा रहे हैं।
हल्दी की रस्म के साथ हुआ शंखनाद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इतवारी बाजार स्थित इस प्राचीन मंदिर को भव्य झालर लाइटों से सजाया गया है। उत्सव के पहले दिन भगवान भोलेनाथ को हल्दी अर्पित की गई। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विपिन पवार ने बताया कि 11 फरवरी को हल्दी की रस्म पूरी हुई, जिसके बाद अब मेहंदी और मंगल गीतों का सिलसिला जारी है।
शिव विवाह का कार्यक्रम (11 से 15 फरवरी):
11 फरवरी: हल्दी की रस्म।
12 फरवरी: मेहंदी उत्सव।
13 फरवरी: मंगल गीत और भजन।
14 फरवरी (महाशिवरात्रि): भव्य शिव बारात।
15 फरवरी: विवाह संपन्न और भोज।
14 फरवरी को निकलेगी अनोखी बारात
इस वर्ष महाशिवरात्रि के दिन निकलने वाली शिव बारात विशेष आकर्षण का केंद्र होगी।
बारात का मार्ग: बारात विंध्यवासिनी मंदिर से शुरू होकर बालक चौक, छत्रपति शिवाजी चौक और बनियापारा होते हुए बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेगी।
झांकियां: बारात में 7 अलग-अलग झांकियां होंगी, जिनमें देव, दानव, भूत-पिशाच, अघोरी बाबा और साधुओं की टोलियां शामिल होंगी।
1400 साल पुराना है मंदिर का इतिहास
श्री बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर शहर की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार:
ऐतिहासिक प्रमाण: यह मंदिर 7वीं-8वीं सदी (लगभग 1400 साल पुराना) का है।
पुरातात्विक साक्ष्य: मंदिर का मूल प्रवेश द्वार आज भी रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय में संरक्षित है।
मान्यता: यहाँ स्थापित शिवलिंग को ‘स्वयंभू’ माना जाता है, जो सदियों से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी कर रहा है।
शहर के प्राचीन विंध्यवासिनी मंदिर और बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर की जुगलबंदी इस महापर्व को और भी खास बना देती है। शिव विवाह की इन रस्मों में शामिल होने के लिए जिले भर से श्रद्धालु उमड़ रहे हैं।







