धमतरी: जिले के मगरलोड ब्लॉक से एक बेहद लल्लनटॉप तस्वीर सामने आई है। लुगे गांव के सरकारी स्कूल में बच्चों को पिज्जा-बर्गर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू से सराबोर पारंपरिक ‘अंगाकर रोटी’ और ‘गुलगुल भजिया’ का न्योता भोज [Community Feast – सामुदायिक दावत] दिया गया।
सरकारी सेवक दंपति की अनोखी पहल
यह शानदार आयोजन स्कूल की शिक्षिका रंजीता साहू और उनके पति तुमनचंद साहू ने किया। दोनों पति-पत्नी सरकारी सेवा में हैं और अपनी नेक कमाई का एक हिस्सा बच्चों की खुशियों पर खर्च कर रहे हैं। इस आयोजन का असली मकसद बच्चों को छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली से रूबरू [Introduce – परिचित] कराना था।
क्या है अंगाकर रोटी (पान रोटी) की खासियत?

अंगाकर रोटी छत्तीसगढ़ की एक ऐसी डिश है जो स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना है:
बनाने का तरीका: इसे चावल के आटे से बनाया जाता है और पलाश या पेंग के पत्तों में लपेटकर अंगारों (मिट्टी की आंच) पर सेंका जाता है।
सेहतमंद: इसमें तेल और मसालों का इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए यह बहुत सुपाच्य [Easy to Digest – आसानी से पचने वाला] होती है।
फायदे: यह ऊर्जा से भरपूर है और पेट व लिवर के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है।
200 से ज्यादा स्कूलों में फैला चुके हैं खुशियां
साहू दंपति का यह सफर सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है। अब तक वे जिले के 203 सरकारी स्कूलों में न्योता भोज करा चुके हैं। खाने के साथ-साथ वे बच्चों को पढ़ाई के लिए पेन-कॉपी, बिस्किट और टॉफी भी बांटते हैं, ताकि बच्चों का मनोबल [Morale – उत्साह] बढ़ सके।
अधिकारियों ने थपथपाई पीठ
विकास खंड शिक्षा अधिकारी मनीष ध्रुव ने इस पहल की तारीफ करते हुए इसे ‘अनुकरणीय’ [Exemplary – उदाहरण देने योग्य] बताया। उनका कहना है कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत [Heritage – पुरानी धरोहर] को समझने में मदद मिलती है।
बचपन की यादों को ताजा करते हुए शिक्षिका रंजीता साहू ने बताया कि देसी घी के साथ अंगाकर रोटी का स्वाद आज भी लोगों के जेहन में बसा है, और वे चाहती हैं कि नई पीढ़ी भी इसे अपनाए।












