छत्तीसगढ़ के बस्तर में पिछले चार दशकों से जारी नक्सली संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि सुरक्षाबलों ने माओवादियों के कब्जे वाले लगभग 95 प्रतिशत इलाके को मुक्त करा लिया है। साल 2024-25 में चले सघन एंटी-नक्सल ऑपरेशंस और सरकार की पुनर्वास नीति के चलते बस्तर संभाग में नक्सलियों का आधार तेजी से सिमटा है।
42,000 वर्ग किमी क्षेत्र में फोर्स की दमदार वापसी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि माओवादियों के प्रभाव वाले लगभग 42,000 स्क्वायर किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में से 90 से 95 प्रतिशत हिस्से पर अब पुलिस और प्रशासन का नियंत्रण हो चुका है। सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के ‘कोर’ इलाकों में नए कैंप स्थापित कर उनके सुरक्षित ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है।
मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य
आईजी सुंदरराज पी ने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार का साझा लक्ष्य मार्च 2026 तक बस्तर से नक्सलवाद को पूरी तरह जड़ से खत्म करना है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबल के जवान दृढ़ संकल्प के साथ काम कर रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम पिछले दो वर्षों के आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहे हैं।
“सरेंडर करें या अंजाम भुगतने को तैयार रहें”
बस्तर आईजी ने बचे हुए नक्सली कैडर्स को सख्त चेतावनी दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कहा कि माओवादियों के पास अब केवल दो ही विकल्प बचे हैं: या तो वे हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल हो जाएं, अन्यथा सुरक्षाबलों की कार्रवाई में उन्हें अपने अंजाम के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने नक्सलियों से सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की है।
2024-25 में मिलीं बड़ी सफलताएं
रिपोर्ट्स के अनुसार, चालू वर्ष के दौरान सुरक्षाबलों ने कई बड़े माओवादी लीडर्स को ढेर किया है। इसके अलावा:
भारी संख्या में नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण (Surrender) किया है।
रिकॉर्ड संख्या में नक्सलियों की गिरफ्तारियां हुई हैं।
अंदरूनी इलाकों में नये सुरक्षा कैंप खुलने से विकास कार्यों में तेजी आई है।
बचे हुए 5% इलाके पर भी जल्द होगा नियंत्रण
आईजी ने भरोसा दिलाया कि जो थोड़ा-बहुत इलाका अभी भी नक्सलियों के प्रभाव में है, उसे खाली कराना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द उन दुर्गम क्षेत्रों को भी माओवादियों के चंगुल से मुक्त कराकर वहां शासन की योजनाएं पहुंचाई जाएंगी।









