बालाघाट: क्या बालाघाट के जंगल अब सुरक्षित नहीं रहे? पिछले 9 दिन में जिले के जंगलों में दो तेंदुओं की रहस्यमयी मौत ने वन्यजीव प्रेमियों और प्रशासन दोनों की नींद उड़ा दी है। पहला शव 23 दिसंबर को उत्तर सामान्य वन परिक्षेत्र लामता में मिला, जबकि नौ दिन बाद 1 जनवरी को दक्षिण लामता अंतर्गत मगदर्रा सर्किल में दूसरी तेंदुआ मरी पाई गई।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार: मौत की असली वजह अभी अनसुलझी
वनमंडलाधिकारी रेशम सिंह धुर्वे ने बताया कि दोनों तेंदुओं की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या कोई और वजह है। फिलहाल, ये दोनों मामले रहस्य बने हुए हैं।
वन्यजीव प्रेमियों की बढ़ती चिंता
वन्यजीव प्रेमी अभय कोचर कहते हैं, “बालाघाट जिले में संरक्षित क्षेत्रों की तुलना में असंरक्षित क्षेत्रों में वन्यजीव ज्यादा हैं। लेकिन जिला स्तर पर वन्यजीव प्रबंधन और प्रशिक्षण काफी कमजोर है। यही कारण है कि वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी ढीली पड़ रही है।”
कोचर ने आरोप लगाया कि जब भी किसी वन्यजीव की संदिग्ध मौत होती है, तो जांच के लिए स्थानीय अमला पेंच और कान्हा नेशनल पार्क जैसे बाहरी संसाधनों पर निर्भर होता है। इसका असर यह होता है कि सच्चाई सामने आने में देरी हो जाती है और कई बार मामले रहस्य बने रहते हैं।
शिकायतें और मांगें
अभय कोचर ने पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि जिले में एक मजबूत और प्रशिक्षित वन्यजीव जांच तंत्र होना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे संदिग्ध मामलों का समय पर और निष्पक्ष खुलासा हो सके।
पहले भी रहस्यमयी मौतें
बालाघाट में यह पहला मामला नहीं है। कुछ हफ्ते पहले:
12 दिसंबर: कटंगी क्षेत्र में करंट लगने से एक सब-एडल्ट बाघ की मौत, आरोपी अब तक फरार।
पहले का मामला: लालबर्रा परिक्षेत्र के सोनवानी अभयारण्य में बाघ की संदिग्ध मौत और शव का बिना प्रोटोकॉल जलाना, जिससे राजनीति भी गरमाई।
इन घटनाओं ने वन विभाग की निगरानी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल अब भी बरकरार
दोनों तेंदुओं की पीएम रिपोर्ट का इंतजार अब बालाघाट के जंगलों में सुरक्षा, प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों की बड़ी चिंता बन गया है। जब तक रिपोर्ट नहीं आती, इन मौतों का रहस्य जिले के लिए एक चुनौती बना रहेगा।












