रायपुर: राजधानी रायपुर में प्रतिबंधित (जिस पर रोक लगी हो) चाइनीज मांझा लोगों की जान का दुश्मन बना हुआ है। देवेंद्र नगर के रहने वाले एक युवक के साथ पंडरी फ्लाईओवर पर दर्दनाक हादसा हो गया, जहां पतंग की जानलेवा डोर ने उसके चेहरे को बुरी तरह चीर दिया।
फ्लाईओवर पर अचानक चेहरे से टकराई ‘मौत की डोर’
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, युवक जब पंडरी फ्लाईओवर से गुजर रहा था, तभी हवा में तैर रहा बारीक चाइनीज मांझा उसके चेहरे से उलझ गया। जब तक वह कुछ समझ पाता, मांझे की धार ने उसके होंठ और गाल को गहरा काट दिया। युवक लहूलुहान हालत में अस्पताल पहुँचा।
पट्टियों में लिपटा चेहरा और 35 टांकों का दर्द
अस्पताल में डॉक्टरों ने युवक की गंभीर हालत को देखते हुए तुरंत इलाज शुरू किया। उसके चेहरे के घावों को भरने के लिए डॉक्टरों को 35 टांके लगाने पड़े। हालांकि युवक की जान बच गई, लेकिन इस हादसे ने उसके चेहरे पर गहरे निशान छोड़ दिए हैं और वह काफी सदमे में है।
“जो मेरे साथ हुआ, वो किसी और के साथ न हो”
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद युवक अपनी शिकायत लेकर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी के पास पहुँचा। युवक ने भावुक होकर अपील की कि प्रशासन को अब तो जागना चाहिए। उसने कहा कि वह नहीं चाहता कि उसके जैसा दर्द किसी और मासूम या नागरिक को सहना पड़े।
प्रशासन की सख्ती पर उठे बड़े सवाल
इस घटना के बाद शहर की सुरक्षा और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। जब चाइनीज मांझे की बिक्री पर पूरी तरह बैन [पाबंदी] है, तो फिर बाजारों में यह धड़ल्ले से कैसे बिक रहा है? नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इसे प्रशासन की बड़ी नाकामी बताया है।
जानलेवा कारोबार पर कब लगेगी लगाम?
आकाश तिवारी ने जिला प्रशासन और निगम पर कड़ा प्रहार करते हुए पूछा कि आखिर किसकी शह पर यह मौत का व्यापार चल रहा है? उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर प्रतिबंधित मांझे की बिक्री नहीं रुकी, तो शहर में कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है, जिसका जिम्मेदार प्रशासन होगा।
डर के साये में राहगीर और आम जनता
मकर संक्रांति के आसपास पतंगबाजी के शौकीनों की वजह से सड़कों पर चलने वाले लोग डरे हुए हैं। खासकर दोपहिया वाहन चलाने वाले लोगों के गले और चेहरे पर मांझा फंसने का खतरा बढ़ गया है। युवक के चेहरे के ये 35 टांके प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान हैं।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन बाजारों में जांच की बात कह रहे हैं, लेकिन सड़कों पर बिखरा मांझा कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है।








