रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शुक्रवार को शहीद शिरोमणि गैंदसिंह के 201वें शहादत दिवस [Martyrdom Day – बलिदान दिवस] के कार्यक्रम में शामिल हुए। सीएम ने शहीद गैंदसिंह को श्रद्धांजलि देते हुए जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास को याद किया और समाज के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
इतिहास में वीरों को नहीं मिला सही स्थान
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कुल 14 जनजातीय क्रांतियां हुईं, जिन्होंने अंग्रेजों की नींव हिला दी थी। उन्होंने दुख जताया कि शहीद वीर नारायण सिंह, गैंदसिंह और वीर गुण्डाधुर जैसे नायकों को इतिहास के पन्नों में वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। सीएम साय ने कहा कि पीएम मोदी ने जनजातीय नायकों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का काम किया है।
नवा रायपुर में स्थापित होगी भव्य प्रतिमा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नामकरण शहीद गैंदसिंह के नाम पर किया जाएगा और वहां उनकी प्रतिमा [Statue – मूर्ति] भी स्थापित की जाएगी। इसके अलावा रायपुर के चंगोराभाटा में समाज के सामुदायिक भवन का जीर्णोद्धार [Renovation – मरम्मत और सुधार] कराया जाएगा।
हल्बा समाज के लिए करोड़ों की सौगात
सीएम साय ने हल्बा समाज के सामाजिक केंद्रों के निर्माण के लिए भी अपना खजाना खोल दिया। उन्होंने बालोद जिले के देवरी, कांकेर के मरकाटोला, दानीटोला, नगरी, डोंगरगांव और बस्तर के भानपुरी व करूटोला में सामाजिक केंद्रों के लिए 10-10 लाख रुपए देने की घोषणा की।
शहीद गैंदसिंह: बस्तर के पहले शहीद
कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा ने इस मौके पर कहा कि शहीद गैंदसिंह छत्तीसगढ़ के पहले वीर शहीद थे। उन्होंने 1824-25 में ही अंग्रेजों के शोषण और संसाधनों की लूट के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था। देश की आजादी की लड़ाई में छत्तीसगढ़ के इन जनजातीय नायकों का योगदान अतुलनीय है।
नवा रायपुर में बना ‘ट्राइबल म्यूजियम’
मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ की 14 जनजातीय क्रांतियों की याद में नवा रायपुर में एक ट्राइबल म्यूजियम [Tribal Museum – जनजातीय संग्रहालय] बनाया गया है। इसका लोकार्पण खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने वीरों के बारे में जान सकें। इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार ने जनजातीय गौरव और उनकी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का मजबूत संदेश दिया है।







