रायपुर/ अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में धान खरीदी का सरकारी काम पूरा हो चुका है, लेकिन आंकड़े काफी मायूस करने वाले हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार संभाग के 5 जिलों में अब भी करीब 33 हजार किसान अपना धान बेचने से वंचित रह गए हैं। इन किसानों का टोकन तक नहीं कट सका है, जिससे अब उनके धान की सरकारी खरीदी पर संकट मंडरा रहा है।
31 जनवरी से पहले ही थमी खरीदी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, धान खरीदी की अंतिम तिथि भले ही 31 जनवरी तय थी, लेकिन शनिवार और रविवार को काम बंद रहने की वजह से शुक्रवार को ही खरीदी की प्रक्रिया थम गई। अब इन 33 हजार से ज्यादा किसानों का धान तभी बिक पाएगा, जब राज्य सरकार धान खरीदी की समय सीमा [Deadline – काम पूरा करने की आखिरी तारीख] आगे बढ़ाएगी।
लक्ष्य से पीछे रही धान की खरीदी
सरगुजा सहकारी बैंक के चीफ मार्केटिंग सुपरवाइजर बीकेपी सिंह के मुताबिक, संभाग में धान खरीदी का लक्ष्य 137 लाख 43 हजार क्विंटल रखा गया था। इसके मुकाबले 30 जनवरी तक केवल 115.70 लाख क्विंटल धान की ही खरीदी हो सकी है। यानी एक बड़ा हिस्सा सरकारी गोदामों तक नहीं पहुंच पाया है।
हजारों किसान अब भी कतार से बाहर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभाग में कुल 2 लाख 21 हजार 411 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से केवल 1 लाख 86 हजार 494 किसान ही अपना धान बेच पाए हैं। लगभग 34,917 पंजीकृत किसान अभी भी शेष हैं, जिनमें से 30 जनवरी को मात्र 201 टोकन जारी हुए। इसका मतलब है कि 33 हजार से ज्यादा किसान बिना धान बेचे रह गए हैं।
सरगुजा और बलरामपुर में पिछले साल से कम खरीदी
जिलेवार आंकड़ों को देखें तो सरगुजा जिले में इस साल 31.24 लाख क्विंटल धान खरीदा गया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 35.10 लाख था। इसी तरह बलरामपुर में भी पिछले साल के 28.55 लाख क्विंटल के मुकाबले इस बार 27.89 लाख क्विंटल की ही खरीदी हुई है।
सूरजपुर, कोरिया और मनेंद्रगढ़ का हाल
सूरजपुर संभाग का इकलौता जिला रहा जहां पिछले साल (36.19 लाख) के मुकाबले इस साल ज्यादा (36.49 लाख क्विंटल) धान खरीदा गया। वहीं, कोरिया में इस साल 11.86 लाख और मनेंद्रगढ़ में 8.54 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई, जो कि पिछले साल के आंकड़ों से कम है।
किसानों की उम्मीद अब सरकार पर
धान खरीदी की प्रक्रिया बंद होने के बाद अब उन 33 हजार किसानों की नजरें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। अगर सरकार तारीख नहीं बढ़ाती है, तो इन किसानों को अपना धान खुले बाजार में कम दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ सकता है।
फिलहाल, किसानों और संगठनों की ओर से तारीख बढ़ाने की मांग उठने की संभावना है। देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है। 🚩













