रतलाम के पास दिल्ली–मुंबई रेल मार्ग पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का हाई-स्पीड ट्रायल सफल रहा। 16 कोच की इस स्वदेशी ट्रेन को अधिकतम 182 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर चलाकर परखा गया, और इतनी तेज स्पीड पर भी ट्रेन की स्थिरता (स्टेबिलिटी) बरकरार रही।
क्या-क्या परखा गया?
कोटा से नागदा रेलवे स्टेशन के बीच हुए इस ट्रायल में ट्रेन की स्थिरता, दोलन (हिलना), कंपन (वाइब्रेशन), आपातकालीन ब्रेक प्रणाली, संरक्षा प्रणाली और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की गई। ट्रायल के बाद ट्रेन का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया और इसे पूरी तरह सफल घोषित किया गया।
पानी से भरा गिलास हिलना छोड़ो छलका तक नहीं
मुख्य आयुक्त रेल सुरक्षा (CRS) जनक कुमार गर्ग की मौजूदगी में ट्रेन का स्पीड ट्रायल किया गया। कोच के अंदर पानी से भरे कांच के गिलासों का पिरामिड बनाकर रखा गया। 182 km/h की रफ्तार पर भी एक बूंद पानी नहीं छलकी, जैसा कि कोटा रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी द्वारा जारी वीडियो में दिखाया गया।
अंतिम हाई-स्पीड टेस्ट भी पास
डीआरएम कोटा अनिल कालरा के मुताबिक, पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन (संस्करण–2) का अंतिम उच्च गति परीक्षण कोटा–नागदा खंड पर किया गया।
यह परीक्षण 180 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति पर हुआ, जिसमें सभी तय तकनीकी मानकों की गहन जांच की गई।
इसका मतलब क्या है?
इस ट्रायल से सिर्फ ट्रेन नहीं, बल्कि दिल्ली–मुंबई रेल मार्ग की गति क्षमता भी परखी गई है। इससे भविष्य में इस रूट पर हाई-स्पीड ट्रेन चलाने की हरी झंडी मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
16 कोच, पूरी तरह मॉडर्न
स्वदेशी वंदे भारत स्लीपर की 16 कोचों की रेक लंबी दूरी के यात्रियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसमें स्लीपर बर्थ, उन्नत सस्पेंशन प्रणाली, स्वचालित दरवाजे, आधुनिक शौचालय, अग्नि व संरक्षा निगरानी प्रणाली, CCTV आधारित सुरक्षा, डिजिटल यात्री सूचना प्रणाली और ऊर्जा दक्ष प्रणालियां शामिल हैं।
कोटा डिवीजन से रतलाम डिवीजन तक हुए इस सफल स्पीड ट्रायल ने साफ कर दिया है कि दिल्ली–मुंबई रेल मार्ग पर हाई-स्पीड ट्रेनों का भविष्य तैयार है। आने वाले समय में इस रूट पर वंदे भारत स्लीपर सहित अन्य ट्रेनें भी 160 km/h की रफ्तार से दौड़ती नजर आ सकती हैं।










