रायपुर: इस बार गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी नजर आएगी, जिसमें देश के पहले डिजिटल जनजातीय संग्रहालय की झलक दिखाई जाएगी। रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने इसे मुख्य समारोह के लिए चुना है।
कैसे हुआ छत्तीसगढ़ का सिलेक्शन
सभी राज्यों ने अपनी-अपनी झांकियों का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा था। करीब 4 महीने लंबी चयन प्रक्रिया के बाद 17 राज्यों की झांकियां फाइनल हुईं, जिनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है।
5 स्टेज की कठिन परीक्षा
जनसंपर्क विभाग के मुताबिक, छत्तीसगढ़ की झांकी को 5 चरणों की कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। पहले थीम और डिजाइन चुना गया। इसके बाद रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के सामने 3D मॉडल पेश किया गया। फिर म्यूजिक का चयन हुआ। इन सभी स्टेप्स के बाद झांकी को अंतिम मंजूरी मिली।
विशेषज्ञ समिति की मुहर
जनसंपर्क विभाग के सचिव रोहित यादव के अनुसार, विशेषज्ञ समिति ने झांकी की थीम और डिजाइन की जमकर सराहना की और इसे अंतिम स्वीकृति दी।
झांकी में क्या दिखेगा और क्यों खास है?
झांकी में उस डिजिटल संग्रहालय को दिखाया जाएगा, जो जनजातीय वीर नायकों को समर्पित है। इस संग्रहालय का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती पर नवा रायपुर अटल नगर में किया था।
‘स्वतंत्रता का मंत्र–वंदे मातरम्’ थीम
जनसंपर्क आयुक्त डॉ. रवि मित्तल के मुताबिक, छत्तीसगढ़ की झांकी भारत सरकार की थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र–वंदे मातरम्’ पर आधारित है। इसमें आदिवासी समाज के उन वीर नायकों के बलिदान को दिखाया गया है, जिनके सम्मान में यह डिजिटल संग्रहालय बनाया गया है।
नई पीढ़ी तक कैसे पहुंचेगी कहानी
डिजिटल संग्रहालय को इस तरह डिजाइन किया गया है कि जनजातीय विद्रोहों की वीरता, एकजुटता और स्वतंत्रता के प्रति समर्पण नई पीढ़ी तक रोचक और प्रेरणादायक तरीके से पहुंच सके।
CM का रिएक्शन
झांकी के चयन पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बधाई दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की झांकी के जरिए आदिवासी समाज की देशभक्ति, अद्भुत वीरता और अपने सिद्धांतों के लिए प्राण न्योछावर करने की परंपरा पूरे देश को देखने को मिलेगी।यह राज्य के लिए गर्व और उत्साह का विषय है।
कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी सिर्फ एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि जनजातीय वीरता और बलिदान की डिजिटल कहानी है, जो अब पूरे देश के सामने दिखेगी।








