रायपुर में शनिवार को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार कार्यक्रम चल रहा था। मंच से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उनका जोर एक बात पर था—गुड गवर्नेंस कागजों में नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी और अफसरों के काम में दिखना चाहिए।
कहां और क्यों अहम है यह कहानी?
यह कार्यक्रम रायपुर में आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 से जुड़ा था। इसी मंच से ई-प्रगति पोर्टल का शुभारंभ हुआ। सरकार का दावा है कि यह पोर्टल योजनाओं की निगरानी और प्रशासनिक समन्वय को नई दिशा देगा।
ई-प्रगति पोर्टल क्या बदलेगा?
ई-प्रगति पोर्टल के जरिए छत्तीसगढ़ के सभी विभागों के 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंजूरी से लेकर बजट, मजदूरी, भुगतान, एमआईएस और स्ट्रक्चर लेवल तक की जानकारी अब रियल-टाइम में मुख्यमंत्री कार्यालय से देखी जा सकेगी।
गुड गवर्नेंस की सोच
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुशासन का मतलब यह है कि समाज के अंतिम व्यक्ति को बुनियादी सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। पंचायतों में शुरू किए गए अटल डिजिटल सेवा केंद्रों से आधार, पेंशन, बैंकिंग और बिल भुगतान जैसी सेवाएं एक ही जगह मिल रही हैं।
नीतिगत सुधार और नई पहल
सीएम साय के मुताबिक, सरकार ने देश का पहला सुशासन एवं अभिसरण विभाग बनाया है। पिछले दो वर्षों में 400 से अधिक नीतिगत सुधार किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘पहल’ और ‘प्रेरणा’ जैसी योजनाएं शुरू की जा रही हैं और जल्द ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर भी शुरू होगा।
जिलों के नवाचार, जिनको मिला सम्मान
मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के तहत पांच जिलों को सम्मानित किया गया। दंतेवाड़ा को ब्लॉकचेन आधारित भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण के लिए चुना गया, जिससे जमीन के रिकॉर्ड हफ्तों की बजाय मिनटों में मिलने लगे।
बुनियादी ढांचे और पोषण पर फोकस
जशपुर जिले की ‘निर्माण जशपुर’ पहल को डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए परियोजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए सम्मान मिला। मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकी में संवर्धित टेक-होम राशन (A-THR) नवाचार को कुपोषण से निपटने के प्रयास के तौर पर चुना गया।
तकनीक से सुरक्षा और संतुलन
गरियाबंद जिले की हाथी ट्रैकिंग और अलर्ट ऐप को मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए सम्मान मिला। नारायणपुर जिले के ‘इंटिफाई इंटेलिजेंस टूल’ को आंतरिक सुरक्षा में डेटा एकीकरण के लिए चुना गया।
विभागीय स्तर पर क्या बदला
विभागीय श्रेणी में शिक्षा विभाग के विद्या समीक्षा केंद्र, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के वन-क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम, आबकारी विभाग की ई-गवर्नेंस सुधार पहल, वन विभाग की FDS 2.0 ई-कुबेर प्रणाली और पंचायत विभाग की मनरेगा में QR कोड आधारित सूचना प्रणाली को सम्मान मिला।
आज की स्थिति और आगे की दिशा
इस कार्यक्रम के जरिए सरकार ने यह संकेत दिया है कि तकनीक और निगरानी को प्रशासन का केंद्र बनाया जा रहा है। ई-प्रगति पोर्टल और जिलों के नवाचार अब जमीन पर कितना असर दिखाते हैं, इस पर आने वाले समय में सबकी नजर रहेगी।
कहानी अभी जारी है।












