मनेंद्रगढ़: सुबह के करीब 10 बजे हैं। प्राथमिक पाठशाला चंदेला के छोटे से कमरे में बच्चे चुपचाप बैठे हैं। किसी के हाथ में स्लेट है, किसी के पास पुरानी किताब।
ब्लैकबोर्ड खाली है… और गुरुजी?
वो क्लास में ही सो रहे हैं, कान में मोबाइल और गाना चल रहा है।
यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के भरतपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत गढ़वार के आश्रित ग्राम चंदेला की प्राथमिक पाठशाला की सच्चाई है। ये पूरी रिपोर्ट ईटीवी भारत पर आई है और उसी के अनुसार आगे पूरी कहानी आपको पढ़ने को मिलेगी।
पूरे स्कूल की जिम्मेदारी एक ही गुरुजी के भरोसे
चंदेला की इस प्राथमिक पाठशाला में पूरे स्कूल की जिम्मेदारी सिर्फ एक शिक्षक पर है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वही शिक्षक स्कूल सबसे कम आते हैं और जब कभी आते भी हैं, तो पढ़ाने के बजाय सोना और गाना सुनना उनकी दिनचर्या बन चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई से शिक्षक का कोई सरोकार नहीं दिखता।
शराब, गैरहाजिरी और लापरवाही ग्रामीणों का सीधा आरोप
ग्रामीण मंगल पाव बताते हैं कि बच्चे रोज स्कूल जाते हैं, लेकिन गुरुजी अक्सर नदारद रहते हैं। उनका आरोप है कि शिक्षक शराब पीते हैं, बाहर बैठकर शराबखोरी करते हैं और बच्चों को पढ़ाने में कोई दिलचस्पी नहीं लेते। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में शिक्षक की मौजूदगी नाममात्र की है और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है।
ना क, ख, ग… ना ए, बी, सी बच्चों का भविष्य दांव पर
हालात इतने खराब हैं कि बच्चों को न गिनती आती है,
न क, ख, ग की पहचान है और न ही ए, बी, सी, डी।
रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण रामधनी कहते हैं “बच्चों को कुछ भी नहीं सिखाया जा रहा। पढ़ाई का स्तर पूरी तरह गिर चुका है।”
वनांचल का बहाना, लापरवाही की छूट
ग्राम पंचायत गढ़वार के सरपंच रामफल पंडो मानते हैं कि इलाका वनांचल और दूरस्थ जरूर है लेकिन इसी का फायदा उठाकर शिक्षक समय पर स्कूल नहीं आते। सरपंच का कहना है कि कई बार शिक्षक 11–12 बजे किसी तरह स्कूल पहुंचते हैं,
वो भी शराब पीकर,
और फिर क्लास में सो जाते हैं।
“शिक्षा के मंदिर में ये बर्दाश्त नहीं” पूर्व विधायक का सख्त रुख
मामले पर पूर्व विधायक चंपा देवी पावले ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर शिक्षा के मंदिर में शिक्षक सो रहा है और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है, तो ऐसे शिक्षक पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से बात कर उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही है और चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ी तो मामला रायपुर तक उठाया जाएगा। पूर्व विधायक ने साफ कहा कि दोषी शिक्षक को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
सवालों से बचते नजर आए गुरुजी
जब संबंधित शिक्षक से स्कूल में सोने और गाना सुनने के आरोपों को लेकर सवाल किया, तो शिक्षक जवाब देने के बजाय मुस्कुराते हुए वहां से निकल गए।
निगरानी फेल, शिकायतें बेअसर
सबसे बड़ा सवाल शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर खड़ा हो रहा है। ग्रामीणों और सरपंच द्वारा कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद न किसी अधिकारी ने स्कूल का निरीक्षण किया और न ही अब तक कोई ठोस कार्रवाई हुई।
ग्रामीणों की मांग है कि लापरवाह शिक्षक को तुरंत हटाया जाए
और स्कूल में किसी जिम्मेदार शिक्षक की पोस्टिंग की जाए,
ताकि चंदेला के बच्चों का भविष्य अंधेरे में जाने से बच सके।












