नारायणपुर: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में एक अनोखी शादी चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह कार्यक्रम’ के तहत 4 ऐसे जोड़ों ने फेरे लिए, जो कभी नक्सली संगठन का हिस्सा थे। आत्मसमर्पण [सरेंडर करना या हथियार डालना] करने के बाद अब ये जोड़े समाज की मुख्यधारा में लौट आए हैं।
नक्सलियों ने छोड़ी बंदूक, थामा जीवनसाथी का हाथ
ये चारों जोड़े लंबे समय तक नक्सली संगठन से जुड़े रहे और उसी दौरान एक-दूसरे के करीब आए थे। नारायणपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में इन्होंने विधि-विधान से विवाह किया और नए जीवन की शुरुआत की।
संगठन के खौफ और बंदिशों का किया खुलासा
मुख्यधारा में लौटे इन पूर्व नक्सलियों ने मीडिया से अपना संघर्ष साझा किया। उन्होंने बताया कि नक्सली संगठन के भीतर शादी और परिवार बसाने को लेकर बहुत सख्त बंदिशें [पाबंदियां या रोक] थीं। वहां हर पल जान का खतरा और असुरक्षा बनी रहती थी।
जंगलों में भटकने से बेहतर सम्मान का जीवन
पूर्व नक्सलियों ने बताया कि जंगलों में उनका जीवन बेहद कठिन था, जहां सीमित भोजन और असुरक्षित ठिकानों के बीच भटकना पड़ता था। आत्मसमर्पण के बाद अब उन्हें शासन-प्रशासन की ओर से आवास, राशन और आजीविका [रोज़गार या कमाई का साधन] जैसी सुविधाएं मिल रही हैं।
सरकार की पुनर्वास नीति का असर
यह आयोजन राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति [भटके हुए लोगों को फिर से समाज में बसाने की सरकारी योजना] की सफलता को दिखाता है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के जरिए इन जोड़ों को सम्मान के साथ गृहस्थ जीवन शुरू करने का मौका दिया गया।
मंत्री केदार कश्यप ने दी बधाई
इस मौके पर मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि समर्पित [सरेंडर कर चुके] नक्सली जोड़ों का विवाह होना इस बदलाव का बड़ा संकेत है। उन्होंने सभी नवदंपतियों को सुखद भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
शांति और विश्वास का बड़ा संदेश
नारायणपुर का यह सामूहिक विवाह कार्यक्रम नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विश्वास का संदेश दे रहा है। यह साबित करता है कि अगर सुरक्षा और सम्मान मिले, तो हथियार उठाने वाले लोग भी एक सामान्य और सकारात्मक जीवन जी सकते हैं। इस बड़े घटनाक्रम के बाद अब क्षेत्र में आत्मसमर्पण करने वाले अन्य नक्सलियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।













