राजगढ़ जिले के ब्यावरा में मंगलवार को एक बंदर की 11 केवी विद्युत लाइन (High Voltage बिजली लाइन) की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। हादसा गुरुद्वारे के सामने हुआ, जब बंदर बिजली के खंभे पर चढ़ रहा था और अचानक तार के संपर्क में आ गया।
कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बंदर जैसे ही खंभे पर चढ़ा, वह सीधे विद्युत तार के संपर्क में आ गया। तेज करंट लगते ही उसकी मौके पर ही मौत हो गई। ऊंचाई और करंट की वजह से लोग चाहकर भी उसे बचा नहीं सके।
साथी बंदर उतरा, आंखें नम हो गईं
हादसे के बाद बंदर का एक साथी खंभे से नीचे उतर आया। यह दृश्य देख मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। थोड़ी ही देर में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक वहां जुट गए।
विद्युत सुरक्षा पर उठे सवाल
घटना के बाद लोगों ने इसे दुखद बताया और इलाके की विद्युत सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। चर्चा यही थी कि खुले और खतरनाक तार ऐसे हादसों को न्योता दे रहे हैं।
मौत के बाद भी मिला पूरा सम्मान
स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने बंदर को भगवान हनुमान जी का स्वरूप मानते हुए पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। बंदर को पुष्पमालाओं से सजाया गया और भव्य शवयात्रा निकाली गई।
शवयात्रा गुरुद्वारे से मुक्तिधाम तक
शवयात्रा राजगढ़ रोड स्थित गुरुद्वारे के सामने से शुरू हुई। यह शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए ब्यावरा के मुक्तिधाम तक पहुंची। रास्ते भर “राम नाम सत्य है” और “जय बजरंगबली” के जयघोष गूंजते रहे।
हिंदू रीति-रिवाज से हुआ अंतिम संस्कार
मुक्तिधाम पहुंचने पर हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार बंदर का अंतिम संस्कार किया गया। समाजसेवियों, स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से रामधुन का जाप किया और श्रद्धांजलि दी।
भावना और करुणा की मिसाल
लोगों ने भगवान रामचंद्र जी से प्रार्थना की कि वे अपने परम भक्त हनुमान जी के रूप में बंदर को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने इस घटना को मानवता और जीवों के प्रति करुणा की एक मिसाल बना दिया।








