रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर सरकार की समय-सीमा (Deadline) पर विरोधाभास की स्थिति पैदा हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जहां हाल ही में गुवाहाटी में ’31 मार्च 2026′ तक देश को नक्सल-मुक्त करने का संकल्प दोहराया, वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के एक ताजा बयान ने नई बहस छेड़ दी है।
तारीखों के फेर में उलझा ‘मिशन 2026’
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बस्तर पंडुम कार्यक्रम के बाद रायपुर हेलीपैड पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का संकल्प है कि 31 दिसंबर 2026 तक देश से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा। सीएम के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार ने सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए रणनीतिक डेडलाइन में 9 महीने का विस्तार कर दिया है।
अमित शाह की मार्च वाली डेडलाइन
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (22 फरवरी 2026) को गुवाहाटी में सीआरपीएफ (CRPF) के स्थापना दिवस समारोह में स्पष्ट रूप से 31 मार्च 2026 की समय-सीमा का उल्लेख किया था। गृह मंत्रालय के पिछले आधिकारिक बयानों और पीआईबी (PIB) की रिपोर्ट्स में भी लगातार मार्च 2026 की तारीख का ही जिक्र होता रहा है।
रणनीतिक विस्तार या आपसी तालमेल की कमी?
मुख्यमंत्री साय द्वारा अचानक दिसंबर 2026 की तारीख बताए जाने को लेकर दो तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह या तो प्रशासनिक स्तर पर तालमेल की कमी हो सकती है, या फिर सुरक्षा बलों की नई और अधिक गहन रणनीति का हिस्सा, जिसे ‘मिशन 2026’ के तहत विस्तारित किया गया हो।
बस्तर में विकास और प्रहार साथ-साथ
भले ही तारीखों को लेकर अंतर दिख रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर सरकार की रणनीति बेहद आक्रामक है। ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत अंदरूनी इलाकों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं, वहीं सुरक्षा बल ‘ऑपरेशन प्रहार’ और ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ जैसे बड़े अभियानों के जरिए नक्सलियों के गढ़ को ध्वस्त कर रहे हैं।
विपक्ष उठा सकता है सवाल
नक्सलवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर समय-सीमा के इस बदलाव को विपक्षी दल मुद्दा बना सकते हैं। 31 मार्च और 31 दिसंबर की इन दो अलग-अलग तारीखों के बीच का अंतर सरकार की गंभीरता और दावों पर सवालिया निशान लगा सकता है।







