दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक क्रांतिकारी पहल की गई है। दुर्ग के रुंआबांधा में देश के पहले ‘साथी बाजार’ (Saathi Bazaar) के अधोसंरचना निर्माण कार्य का भूमिपूजन कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।
बिचौलियों का अंत, किसानों की सीधी पहुंच
मंत्री रामविचार नेताम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ‘साथी बाजार’ केवल एक व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि किसानों को बिचौलियों से मुक्त करने का एक सशक्त मंच है। यहाँ किसान अपने उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उन्हें अपनी फसल की सही और बेहतर कीमत मिल सकेगी।

5000 टन का आधुनिक कोल्ड स्टोरेज
बाजार की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ बनने वाला 5000 टन क्षमता का आधुनिक कोल्ड स्टोरेज है।
फायदा: किसान अपनी उपज (सब्जियों और फलों) को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकेंगे।
रणनीति: इससे किसानों को फसल तुरंत सस्ते दामों में बेचने की मजबूरी नहीं होगी; वे बाजार भाव बढ़ने पर अपनी उपज बेच सकेंगे।

12 करोड़ की लागत और विश्वस्तरीय सुविधाएं
लगभग ₹12 करोड़ की लागत से तैयार होने वाले इस बाजार में सुविधाओं का अंबार होगा:
दुकानें: यहाँ लगभग 170 दुकानों का निर्माण किया जाएगा।
वेंडर और गेम जोन: खरीदारी के साथ-साथ मनोरंजन के लिए वेंडर जोन और गेम जोन की व्यवस्था होगी।
महिला सशक्तिकरण: महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए विशेष प्लेटफॉर्म और स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
संचालन: इस पूरी परियोजना का संचालन ‘दुर्गश्री किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ द्वारा किया जाएगा।
होली से पहले खातों में आएगी अंतर की राशि
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने किसानों को एक और बड़ी खुशखबरी दी। उन्होंने दोहराया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा घोषित धान की अंतर राशि (₹3100 प्रति क्विंटल के मान से) होली के त्योहार से पहले एकमुश्त किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर कर दी जाएगी।
विपक्ष पर निशाना
जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर बोलते हुए नेताम ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने संसाधनों का दोहन किया, जबकि वर्तमान साय सरकार संरक्षण और विकास के संतुलन के साथ किसानों के हित में काम कर रही है।
इस गरिमामयी समारोह में शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, राज्य बीज निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर सहित बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।










