रायपुर: छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने प्रदेश में जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘छत्तीसगढ़ धर्म की आजादी विधेयक-2026’ के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी गई। इस कानून का मुख्य उद्देश्य लालच, धोखाधड़ी, दबाव या गलत जानकारी देकर किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को प्रभावी ढंग से रोकना है।
धर्मांतरण पर अब होगी सख्त कार्रवाई
डिप्टी सीएम अरुण साव ने बैठक के बाद बताया कि वर्तमान में राज्य में 1968 का पुराना अधिनियम लागू है। नया विधेयक अब इसे और अधिक सख्त और असरदार बनाएगा। उम्मीद है कि इसी बजट सत्र में इसे विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा।
प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से ‘सेस’ खत्म, राजीव गांधी मितान क्लब का बोझ हटा
कैबिनेट ने एक और राहत भरा फैसला लेते हुए छत्तीसगढ़ सेस (संशोधन) विधेयक-2026 को मंजूरी दी है। इसके तहत अब जमीन या मकान की रजिस्ट्री पर लगने वाला अतिरिक्त सेस खत्म कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि 2023 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राजीव गांधी मितान क्लब के लिए 12 प्रतिशत का अतिरिक्त सेस लगाया था।
चूंकि अब यह योजना बंद हो चुकी है, इसलिए साय सरकार ने जनता पर से यह आर्थिक बोझ हटाने का निर्णय लिया है।
युवाओं और सरकारी भर्तियों के लिए नया बोर्ड
राज्य में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ‘छत्तीसगढ़ स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड’ के गठन को मंजूरी दी गई है। यह बोर्ड ग्रुप C और ग्रुप D (तकनीकी और गैर-तकनीकी) पदों के लिए परीक्षाएं आयोजित करेगा। साथ ही, भर्ती परीक्षाओं में नकल और अनुचित साधनों को रोकने के लिए अनुचित साधन निवारण विधेयक-2026 के ड्राफ्ट को भी हरी झंडी दी गई है।
कैबिनेट के अन्य महत्वपूर्ण फैसले:
राजनीतिक केस वापस: आंदोलन और राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों से जुड़े 13 मामले वापस लेने का फैसला किया गया है।
सौर ऊर्जा पर सब्सिडी: सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए साल 2024-25 और 2025-26 में सोलर हाई-मास्ट प्लांट पर 1.5 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी।
बायोगैस प्लांट: घरेलू बायोगैस प्लांट के लिए 9,000 रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी का प्रस्ताव मंजूर किया गया है।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग: हाउसिंग बोर्ड एक्ट और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट में संशोधन के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है।
साय कैबिनेट के इन फैसलों से साफ है कि सरकार एक तरफ कानून-व्यवस्था और भर्ती पारदर्शिता पर जोर दे रही है, तो दूसरी तरफ आम जनता को टैक्स और सब्सिडी के मोर्चे पर राहत देने की कोशिश में है।









