रायपुर : छत्तीसगढ़ में अफीम की अवैध खेती को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। विपक्ष के तीखे हमलों और ‘अफीमगढ़’ जैसे आरोपों के बाद सीएम ने सीधे तौर पर राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को मैदान में उतार दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी कोने में अवैध अफीम की खेती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
15 दिन की डेडलाइन और ‘क्लीन चिट’ सर्टिफिकेट
मुख्यमंत्री साय ने सभी कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों के संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने का आदेश दिया है। शासन की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक:
कलेक्टरों को 15 दिन के भीतर अपने जिले की विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी।
रिपोर्ट के साथ यह प्रमाण पत्र (Certificate) भी देना होगा कि उनके जिले में कहीं भी अफीम की अवैध खेती नहीं हो रही है।
आयुक्त भू-अभिलेख ने मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सभी जिलों को इस संबंध में औपचारिक पत्र जारी कर दिया है।
मादक पदार्थों पर ‘जीरो टॉलरेंस’
मुख्यमंत्री ने दोटूक कहा है कि छत्तीसगढ़ में नशे के अवैध कारोबार और उत्पादन के खिलाफ सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने प्रशासन को सख्त हिदायत दी है कि इस काले कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए और दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
भूपेश बघेल का ‘स्टार्टअप’ वाला वार और 17 मार्च का घेराव
सीएम साय की यह सक्रियता पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने तंज कसते हुए अफीम की खेती को भाजपा का ‘नया स्टार्टअप’ बताया था। बघेल ने आरोप लगाया था कि अफीम उगाने वाले लोग सत्ता पक्ष के करीबी हैं और मीडिया उनके नाम उजागर करने से डर रहा है। बघेल ने दावा किया है कि उनके पास इन संबंधों के पुख्ता सबूत हैं।
इधर, कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। आगामी 17 मार्च को कांग्रेस अफीम की खेती और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर विधानसभा घेराव की तैयारी में है। विपक्ष के इस बड़े प्रदर्शन से पहले सरकार ने कलेक्टरों को जवाबदेही सौंपकर डैमेज कंट्रोल और जमीनी कार्रवाई तेज कर दी है।









