सूरजपुर: जिला मुख्यालय से महज कुछ दूरी पर स्थित देवीपुर के शासकीय माध्यमिक शाला (अंबेडकर पारा) से एक विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में स्कूल की छोटी-छोटी बच्चियां मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) के भारी-भरकम बर्तन धोती नजर आ रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये बच्चे स्कूल के पास स्थित एक गंदे नाले के पानी में बर्तन साफ कर रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
रसोइयों की हड़ताल का खामियाजा भुगत रहे मासूम
प्रदेश भर में मानदेय बढ़ाने और अन्य मांगों को लेकर रसोइयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल चल रही है। इस हड़ताल के कारण स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। खाना बनाने से लेकर परोसने और सफाई तक की जिम्मेदारी अब भगवान भरोसे है। सूरजपुर के इस स्कूल में रसोइयों की अनुपस्थिति का सीधा बोझ मासूम बच्चों पर डाल दिया गया है, जिन्हें पढ़ाई छोड़कर नाले के किनारे बर्तन मांजने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
गंदे पानी से बीमारियों का खतरा
वीडियो में दिख रहा है कि बच्चे नाले के दूषित पानी का उपयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बर्तनों में दोबारा खाना परोसने से बच्चों में डायरिया, पीलिया और संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों ने स्कूल प्रबंधन की इस घोर लापरवाही पर कड़ा रोष व्यक्त किया है।
शिक्षा विभाग हरकत में, जांच कमेटी गठित
मामला सुर्खियों में आने के बाद सूरजपुर शिक्षा विभाग ने संज्ञान लिया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अजय मिश्रा ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।
जांच कमेटी: पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच के लिए एक विशेष कमेटी गठित की गई है।
सख्त कार्रवाई की चेतावनी: डीईओ ने स्पष्ट किया है कि वीडियो की सत्यता की पुष्टि होते ही संबंधित प्रधान पाठक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने घेरा
शिक्षा के अधिकार और बाल श्रम कानूनों की सरेआम उड़ रही धज्जियां अब राजनीतिक मुद्दा भी बनती जा रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर रसोइया हड़ताल पर हैं, तो प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी, न कि बच्चों को श्रम में धकेलना चाहिए था।









