जगदलपुर: बस्तर में लाल आतंक के खात्मे की दिशा में आज एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा गया। दशकों तक अबूझमाड़ और दक्षिण बस्तर के जंगलों में खौफ का पर्याय रहे सीनियर माओवादी कमांडर पापाराव ने अपने 17 साथियों के साथ समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। जगदलपुर जिला मुख्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में गृहमंत्री विजय शर्मा की मौजूदगी में इन नक्सलियों ने औपचारिक रूप से पुनर्वास किया।
हथियारों का जखीरा और 10 लाख कैश समर्पित
कभी पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहे पापाराव और उनके दस्ते ने आत्मसमर्पण के साथ ही आधुनिक हथियारों का बड़ा जखीरा भी पुलिस को सौंप दिया। समर्पण के वक्त नक्सलियों ने जमा किए:
08 एके-47 (AK-47) राइफलें
02 इंसास (INSAS) राइफलें
04 303 राइफलें
01 बीजीएल (BGL) लॉन्चर और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस।
इसके अलावा, नक्सलियों ने संगठन के 10 लाख रुपये नकद भी पुलिस के हवाले किए। प्रशासन ने इस मौके पर सभी पूर्व नक्सलियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया और उन्हें भारत का संविधान भेंट कर मुख्यधारा में शामिल होने की बधाई दी।
कौन है पापाराव? ताड़मेटला का वो काला इतिहास
56 वर्षीय पापाराव (उर्फ सुनम चंदरैय्या) नक्सल संगठन में एक ‘बड़ा नाम’ रहा है। सुकमा जिले का निवासी पापाराव दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZCM) का सदस्य और पश्चिम बस्तर डिवीजन का इंचार्ज था।
ताड़मेटला कांड का मास्टरमाइंड: साल 2010 में ताड़मेटला में हुए भीषण हमले का मुख्य सूत्रधार पापाराव को ही माना जाता है, जिसमें देश के 76 जवान शहीद हुए थे।
रणनीतिकार: वह दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का अहम सदस्य था और कैडर संचालन में उसकी भूमिका निर्णायक होती थी।
‘पूना मारगेम’ से आ रही है ‘नई सुबह’
गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि हिंसा के रास्ते से कुछ हासिल नहीं होता। उन्होंने पापाराव के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब वे संवैधानिक तरीके से जल, जंगल और जमीन के लिए काम कर सकते हैं। बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने दावा किया कि 31 मार्च तक की तय समय सीमा के भीतर बस्तर से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा।
पापाराव ने भी स्वीकार किया कि वह अब आदिवासियों के हक की लड़ाई संविधान के दायरे में रहकर लड़ना चाहता है। राज्य सरकार की ‘पूना मारगेम’ (गोंडी भाषा में अर्थ: नई सुबह) योजना के तहत इन सभी को शिक्षा, रोजगार और पुनर्वास की बेहतर सुविधाएं दी जाएंगी।










