रायपुर: छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर एक बड़ा और भावुक बयान दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि सरकार बस्तर में एक भी गोली नहीं चलाना चाहती, लेकिन विकास के रास्ते में आने वाली किसी भी बाधा या हिंसा को बर्दाश्त भी नहीं किया जाएगा। बस्तर रवाना होने से पहले पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने नक्सलियों के बचे हुए कैडर को मुख्यधारा में लौटने का खुला न्योता दिया।
“सरेंडर नहीं, यह ससम्मान पुनर्वास है”
विजय शर्मा ने कहा कि जो लोग भटक गए हैं, उनके लिए सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं। उन्होंने हाल ही में अपने निवास पर आत्मसमर्पित नक्सलियों के साथ किए गए भोजन और उनके विधानसभा दौरे का जिक्र करते हुए कहा, “हम इसे सरेंडर नहीं, बल्कि ससम्मान पुनर्वास कहते हैं। आप आइए, हम लाल कालीन (रेड कार्पेट) बिछाकर आपका स्वागत करेंगे। अगर आप अपनी विचारधारा के साथ जनता की सेवा करना चाहते हैं, तो करिए, हमें कोई आपत्ति नहीं है।”
शिक्षा और विकास पर हमला बर्दाश्त नहीं
गृहमंत्री ने कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि हथियार के दम पर बस्तर के विकास को रोकना अब मुमकिन नहीं होगा। उन्होंने कहा:
हिंसा पर रोक: “शिक्षा दूतों की हत्या और सड़कों-तालाबों के किनारे आईईडी (IED) बिछाने जैसी कायरतापूर्ण हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।”
संविधान का राज: “अगर कोई कहता है कि बस्तर में भारत का संविधान लागू नहीं होगा, तो यह उसकी भूल है। बस्तर के हर कोने तक संविधान पहुंचेगा और वहां की जनता को उसका हक मिलेगा।”
लघु वनोपज बनेगा समृद्धि का आधार
बस्तर की अर्थव्यवस्था को लेकर डिप्टी सीएम ने कहा कि वहां के लोगों के जीवन में रची-बसी ‘सहकारिता’ को अब कागजों और धरातल पर मजबूती से उतारा जा रहा है। उन्होंने बताया कि सांसद, विधायक और प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव के नेतृत्व में पूरी टीम लगी हुई है ताकि बस्तर के लघु वनोपज (Forest Produce) वहां के आदिवासियों की आय और समृद्धि का मुख्य जरिया बन सकें।
विजय शर्मा का यह बयान एक तरफ ‘नरम’ तो दूसरी तरफ ‘सख्त’ रणनीति का मेल है। एक ओर वे ‘रेड कार्पेट’ की बात कर नक्सलियों के निचले कैडर को मनोवैज्ञानिक रूप से मुख्यधारा की ओर खींच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ‘संविधान लागू करने’ की बात कहकर यह संदेश दे रहे हैं कि राज्य की सत्ता और कानून के सामने कोई भी समानांतर व्यवस्था नहीं चलेगी। गृहमंत्री का यह रुख बताता है कि सरकार अब बस्तर में केवल सैन्य ऑपरेशन नहीं, बल्कि ‘भरोसे’ और ‘विकास’ के जरिए शांति बहाल करना चाहती है।









