रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आज जांजगीर-चांपा जिले में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) मद की राशि को लेकर भारी हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बघेल ने मंत्री के अधिकारों पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘बेबस’ करार दिया।
सवाल: कलेक्टर की मर्जी या जनप्रतिनिधियों की जरूरत?
विवाद की शुरुआत कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप के सवाल से हुई। कश्यप ने आरोप लगाया कि जांजगीर-चांपा जिले में औद्योगिक इकाइयों से मिलने वाली सीएसआर राशि का बंदरबांट हो रहा है।
विधायक का आरोप: “जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया है। कलेक्टर अपनी मर्जी से काम बांट रहे हैं। शहरी क्षेत्रों के काम ग्राम पंचायतों को दिए जा रहे हैं और औद्योगिक क्षेत्र से 30 किलोमीटर दूर के गांवों में पैसा खर्च किया जा रहा है। आखिर कलेक्टर ही सर्वेसर्वा हैं, तो समितियों का क्या काम?”
मंत्री की दलील: “मेरे हाथ बंधे हैं”
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने जवाब देते हुए कहा कि सीएसआर मद पर भारत सरकार का नियंत्रण होता है। उन्होंने सफाई दी:
सीमित अधिकार: “सीएसआर में राज्य शासन का सीधा हस्तक्षेप नहीं होता। कलेक्टर उद्योगों से मिलने वाली राशि का आवंटन अपनी देखरेख में करते हैं। विधायक के दो प्रस्ताव प्रक्रियाधीन हैं।”
बड़ा बयान: जब विधायक ने कुछ गांवों को प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग की, तो मंत्री ने हाथ खड़े करते हुए कहा— “घोषणा करने का अधिकार मुझे नहीं है, आप कलेक्टर के साथ बैठकर काम करवाइए।”
भूपेश बघेल का ‘पावर पंच’: “कलेक्टर पर कंट्रोल नहीं आपका”
मंत्री के इस बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सदन में मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने मंत्री की ‘मजबूरी’ पर तंज कसते हुए कहा:
“मंत्री कह रहे हैं कि मैं कलेक्टर को निर्देश नहीं दे सकता और आप कलेक्टर के पास जाकर बैठ जाइए। जब सारा काम कलेक्टर को ही करना है और आप आदेश नहीं दे सकते, तो फिर किस बात के लिए मंत्री बने हैं? यहां बैठने का क्या औचित्य है?”
बघेल ने सत्ता पक्ष को घेरते हुए कहा कि मंत्री की घोषणा पत्थर की लकीर होनी चाहिए जिसे पूरा करना कलेक्टर की बाध्यता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों पर शासन का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है।
सदन में टकराव: ‘गुंतंत्र’ बनाम ‘गणतंत्र’ की गूंज
मंत्री देवांगन ने पलटवार करते हुए कहा कि वे नियमों और मर्यादा के दायरे में रहकर ही बात कर रहे हैं। हालांकि, विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा और सदन में काफी देर तक शोर-श
राबा चलता रहा।









