रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आज आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन को लेकर भारी हंगामा हुआ। दिलचस्प बात यह रही कि इस मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के अपनी ही पार्टी के दिग्गज विधायकों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। मामला इतना गरमाया कि मंत्री को सदन में आश्वासन देना पड़ा कि एक हफ्ते के भीतर इस पर ठोस निर्णय लिया जाएगा और जरूरत पड़ी तो सरकार नया कानून भी लाएगी।
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अपोलो जैसे बड़े अस्पतालों पर चुप्पी क्यों?
बिलासपुर के अपोलो अस्पताल का मुद्दा उठाते हुए विधायक सुशांत शुक्ला ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वे सात बार पत्र लिख चुके हैं, लेकिन बड़े निजी अस्पतालों को योजना के दायरे में लाने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कांग्रेस विधायक कविता प्राण लहरे ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए आरोप लगाया कि निजी अस्पताल कार्डधारियों को लौटा रहे हैं और गंभीर बीमारियों का इलाज नहीं मिल पा रहा है।
अपनी ही सरकार को घेरा: अजय चंद्राकर और धर्मजीत सिंह के कड़े तेवर
भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर, धर्मजीत सिंह और अमर अग्रवाल ने स्वास्थ्य मंत्री के उस जवाब पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने कहा कि “नियम-निर्देशों के अनुसार निर्णय लेना होगा।”
अजय चंद्राकर ने दोटूक पूछा— “अगर यह प्रधानमंत्री मोदी की सबसे बड़ी जनहितैषी योजना है, तो निजी अस्पतालों को इसमें शामिल करने के लिए सरकार हिचक क्यों रही है? इसके नियम क्या हैं, उसे सदन के पटल पर रखिए।”
विधायकों की नाराजगी इस बात पर थी कि सरकार बड़े और अच्छे अस्पतालों को इस योजना में अनिवार्य रूप से शामिल क्यों नहीं कर पा रही है।
मंत्री का बड़ा एलान: “एक हफ्ते में समीक्षा, लाएंगे कानून”
चारों तरफ से घिरने के बाद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार की मंशा साफ है। उन्होंने घोषणा की:
अगले एक सप्ताह के भीतर स्वास्थ्य विभाग इसकी विस्तृत समीक्षा करेगा।
बड़े और प्रतिष्ठित अस्पतालों को आयुष्मान योजना से जोड़ने के लिए नियमों में बदलाव किया जाएगा।
अगर अस्पताल स्वेच्छा से आगे नहीं आते हैं, तो सरकार कानून बनाकर उन्हें योजना के तहत मरीजों का इलाज करने के लिए बाध्य करेगी।
सदन की आसंदी (स्पीकर) ने भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री को जल्द से जल्द निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम जनता की सेहत और उनकी जेब से जुड़ा मामला है।









