रायपुर/बिरगांव: राजधानी से लगे बिरगांव नगर निगम में रविवार शाम होली के रंगों और फाग गीतों की ऐसी महफिल जमी कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी खुद को रोक नहीं पाए। ‘होली मिलन समारोह’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री ने न केवल जनता पर पिचकारी से रंगों की बौछार की, बल्कि ढोल-नगाड़ों की थाप पर क्षेत्रवासियों के साथ त्योहार की खुशियां भी बांटीं।
किसानों की समृद्धि से आई त्योहार में रौनक
मंच से जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने इस बार की होली को ‘ऐतिहासिक’ बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने होली से ठीक पहले किसानों के खातों में धान की अंतर राशि (बोनस) भेज दी है, जिससे गांव-गांव में जश्न का माहौल है। मुख्यमंत्री के शब्दों में, “जब हमारे प्रदेश का अन्नदाता खुशहाल होता है, तभी असली त्योहार मनाया जाता है। किसानों की जेब में पैसा पहुंचने से इस बार बाजारों में भी रौनक है और घरों में उल्लास भी दोगुना है।”
नक्सलवाद के खात्मे और बस्तर में शांति का जिक्र
त्योहार के उल्लास के बीच मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सुरक्षा और शांति पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मंशा के अनुरूप अब छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद समाप्ति की ओर है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बस्तर के सुदूर इलाकों में अब गोलियों की गूंज नहीं, बल्कि विकास और शांति की नई इबारत लिखी जा रही है।
अनुज शर्मा की प्रस्तुति और फाग गीतों का जादू
कार्यक्रम में उस वक्त जोश और बढ़ गया जब विधायक और लोक कलाकार अनुज शर्मा ने अपनी प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक मंडली के पारंपरिक फाग गीतों ने पूरे बिरगांव को फागुन के रंग में सराबोर कर दिया। मुख्यमंत्री ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया और कहा कि होली आपसी भेदभाव भुलाकर प्रेम और भाईचारे के साथ आगे बढ़ने का संदेश देती है।
दिग्गजों का जमावड़ा
इस मौके पर रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, और नगर निगम बिरगांव के पार्षदों सहित शासन के विभिन्न बोर्डों के अध्यक्ष और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। नेताओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर प्रदेश की तरक्की और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री का बिरगांव पहुंचना और सीधे जनता के साथ पिचकारी चलाना उनकी ‘सहज और सरल’ नेता वाली छवि को और मजबूत करता है। बार-बार किसानों को दी गई राशि का उल्लेख करना यह साफ संकेत है कि सरकार अपनी आर्थिक नीतियों को सीधे आम आदमी की खुशियों से जोड़कर देख रही है। होली जैसे सामाजिक मंच का उपयोग नक्सलवाद की समाप्ति और विकास के दावों के लिए करना, चुनावी और राजनीतिक रूप से भी एक सधा हुआ कदम है।










