रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आज धान खरीदी और उसके उठाव को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने बस्तर संभाग में धान खरीदी की हकीकत और मिलिंग के लिए धान के उठाव पर सरकार की घेराबंदी की। तीखी बहस और नारेबाजी के बीच, सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्षी दल ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
कांकेर उठाव में सबसे आगे, दंतेवाड़ा पीछे
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सदन में 19 फरवरी 2026 तक की स्थिति के जो आंकड़े पेश किए, उसके अनुसार कांकेर जिला पूरे संभाग में धान उठाव के मामले में सबसे आगे रहा है। कांकेर में कुल 1,47,528.30 मीट्रिक टन धान का उठाव किया गया। इसके बाद कोंडागांव में 58,911.78 मीट्रिक टन और बस्तर जिले में 46,846.86 मीट्रिक टन धान उठाया गया है। वहीं बीजापुर में 21,888.59, नारायणपुर में 17,383.06, सुकमा में 16,608.14 और दंतेवाड़ा में 9,757 मीट्रिक टन धान का उठाव दर्ज किया गया है।
44 हजार किसान केंद्र क्यों नहीं पहुंचे? विपक्ष ने उठाए सवाल
विवाद तब और गहरा गया जब मंत्री ने सदन को बताया कि बस्तर संभाग के 44,612 किसान धान खरीदी केंद्रों पर धान बेचने आए ही नहीं। इस आंकड़े पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को घेरते हुए पूछा कि आखिर कितने किसानों से ‘जबरन रकबा समर्पण’ (Acreage Surrender) कराया गया है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार तकनीकी पेंच फंसाकर किसानों को अपना हक लेने से रोक रही है और इस पर स्पष्ट जानकारी देने से बच रही है।
कवासी लखमा का तंज: धान खरीदोगे या कर्ज माफ करोगे?
विधायक कवासी लखमा ने उन किसानों का मुद्दा उठाया जिन्हें टोकन जारी होने के बावजूद धान बेचने का मौका नहीं मिला। लखमा ने तीखे लहजे में सवाल किया कि जिन किसानों का धान नहीं खरीदा गया और जिन पर बैंक का कर्ज भी है, उनके साथ सरकार क्या न्याय करेगी? उन्होंने पूछा कि क्या सरकार उनका धान अब खरीदेगी या फिर उनका कर्ज माफ करेगी?
सदन से वॉकआउट
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने जवाब में कहा कि जो भी किसान केंद्रों तक पहुंचे, उनका दाना-दाना खरीदा गया है और उठाव की प्रक्रिया लगातार जारी है। हालांकि, विपक्ष मंत्री के इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। कांग्रेस विधायकों ने इसे किसानों के साथ अन्याय करार देते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया, जिससे धान खरीदी का मुद्दा पूरी तरह से गरमा गया।









