रायपुर : राजधानी के बीटीआई मैदान में आयोजित ‘नेशनल ट्रेड एक्सपो 2026’ के समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के आर्थिक भविष्य का खाका पेश किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ अब केवल खनिजों का राज्य नहीं, बल्कि आधुनिक उद्योगों और सुरक्षित व्यापारिक वातावरण का केंद्र बन चुका है।
नक्सलवाद की ‘अंतिम सांसें’ और बस्तर का कायाकल्प
मुख्यमंत्री ने सुरक्षा और विकास को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए बड़ा दावा किया:
डेडलाइन तय: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक प्रदेश से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प लिया गया है।
अबूझमाड़ में शिक्षा की रोशनी: दशकों से अशांत रहे अबूझमाड़ और जगरगुंडा जैसे क्षेत्रों में अब ‘एducation City’ बनाई जाएगी।
वैल्यू एडिशन: बस्तर और सरगुजा के वनोपजों (Forest Produce) का मूल्य संवर्धन कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
बजट की त्रिवेणी: ज्ञान, गति और अब ‘संकल्प’
मुख्यमंत्री साय ने पिछले तीन वर्षों के बजटीय सफर को समझाते हुए कहा:
पहला साल (Gyan): गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी (GYAN) पर केंद्रित।
दूसरा साल (Gati): विकास की योजनाओं को रफ्तार देने के लिए।
तीसरा साल (Sankalp): 1.72 लाख करोड़ का यह बजट ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के संकल्प को समर्पित है।
2047 का विजन: 75 लाख करोड़ की जीएसडीपी का लक्ष्य
राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए ‘विजन डॉक्यूमेंट’ तैयार किया है:
अर्थव्यवस्था को दोगुना करना: अगले 5 वर्षों में राज्य की जीएसडीपी (GSDP) को दोगुना करने का लक्ष्य है।
महा-लक्ष्य: वर्ष 2047 तक छत्तीसगढ़ की इकोनॉमी को 75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है।
भारी निवेश: नई औद्योगिक नीति के चलते अब तक 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव (MOU) प्राप्त हुए हैं, जिनमें सेमीकंडक्टर और एआई (AI) जैसे आधुनिक क्षेत्र शामिल हैं।
पर्यावरण और उद्योग का संतुलन
मुख्यमंत्री ने बताया कि विकास के साथ पर्यावरण का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
7 करोड़ पौधे: ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत रिकॉर्ड वृक्षारोपण हुआ है।
ग्रीन इंडस्ट्री: उद्योगों के लिए काटे गए पेड़ों की भरपाई अनिवार्य वृक्षारोपण से की जा रही है। छत्तीसगढ़ का 44% हिस्सा वनाच्छादित है, जो हमारी सबसे बड़ी पूंजी है।










