अंबिकापुर: उत्तर छत्तीसगढ़ में गर्मी का पारा चढ़ते ही आगजनी का खतरा मंडराने लगा है, लेकिन सरगुजा जिले में इस बार फायर सेफ्टी की जमीनी जांच पूरी तरह ठप पड़ी है। हैरानी की बात यह है कि अब तक प्रशासन, नगर निगम और बिजली विभाग की वह संयुक्त टीम मैदान में नहीं उतरी है, जो हर साल मार्च की शुरुआत में व्यावसायिक भवनों की कुंडली खंगालती थी। पिछले महीने शहर की सात दुकानों के जलकर खाक होने के बाद भी सिस्टम की नींद नहीं खुली है।
सरकारी विभाग लाचार, निजी कंपनियों के पास एनओसी का ‘पावर’
इस सुस्ती के पीछे एक बड़ा नीतिगत बदलाव सामने आया है। फायर एंड सेफ्टी विभाग अब काफी हद तक पंगु नजर आ रहा है क्योंकि सरकार ने फायर सेफ्टी जांच और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने का काम निजी एजेंसियों को सौंप दिया है।
फायर सेफ्टी अधिकारी गुलशन तिवारी के मुताबिक, पहले यह जांच विभाग खुद करता था और होमगार्ड कार्यालय से एनओसी जारी होती थी। अब निजी कंपनियां यह काम देख रही हैं, जिससे विभाग का भवन मालिकों पर नियंत्रण कमजोर हो गया है। एनओसी देने का अधिकार छिनने से विभाग सिर्फ औपचारिक जांच तक सिमट कर रह गया है।
अस्पतालों और मॉल में सबसे ज्यादा खतरा
पिछले साल यानी अप्रैल 2025 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति डरावनी है। दमकल विभाग ने 360 संस्थानों की जांच की थी, जिसमें सबसे ज्यादा खामियां सरकारी और निजी अस्पतालों में मिली थीं। बिलासपुर मेडिकल कॉलेज से लेकर जिले के पीएचसी और सीएचसी तक में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई थी। इसके अलावा शहर के मॉल, होटल, गोदाम और राइस मिलों में भी ज्वलनशील पदार्थों के बीच फायर फाइटिंग सिस्टम नदारद मिले थे।
क्या कहते हैं जिम्मेदार और जानकार?
शहर के सामाजिक कार्यकर्ता ए.एन. पांडे और निवासी शुभान्कुर पाण्डेय का आरोप है कि करोड़ों के मॉल और अस्पताल बन रहे हैं, लेकिन फायर सेफ्टी के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। कई बार नगर निगम बिना गहन जांच के ही कागजों पर एनओसी जारी कर देता है।
इधर, अंबिकापुर नगर निगम के लोक निर्माण विभाग के सभापति मनीष सिंह ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि वे जल्द ही अधिकारियों से चर्चा कर संयुक्त टीम बनाएंगे ताकि गर्मी के चरम पर पहुंचने से पहले निरीक्षण शुरू किया जा सके।
नियमों की उड़ रही धज्जियां: ये हैं जरूरी मानक
नियमों के मुताबिक, किसी भी संस्थान में हर 15 मीटर पर फायर एक्सटिंग्विशर होना अनिवार्य है। बड़े भवनों में स्मोक डिटेक्टर, स्प्रिंकलर, होज रील, फायर अलार्म और अंडरग्राउंड वाटर टैंक जैसे इंतजाम होने चाहिए। लेकिन हकीकत में, शहर के तंग बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ये उपकरण सिर्फ दिखावे के लिए टांगे गए हैं या फिर एक्सपायरी डेट पार कर चुके हैं।









