मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर: छत्तीसगढ़ की सड़कों पर होने वाले हादसों में अब ‘गोल्डन ऑवर’ (दुर्घटना के बाद का पहला घंटा) किसी की जिंदगी बचाने का सबसे बड़ा जरिया बनेगा। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ‘राहवीर योजना’ का ऐलान करते हुए कहा है कि सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले मददगार नागरिक को सरकार 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि और सम्मान देगी।
पुलिस के डर और कानूनी झंझट से मुक्ति
अक्सर देखा जाता है कि सड़क पर तड़पते घायल को देखकर भी लोग पुलिस पूछताछ और कोर्ट-कचहरी के डर से मदद के लिए आगे नहीं आते। इसी डर को खत्म करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने खड़गवां के एक कार्यक्रम में साफ किया कि अब किसी भी मददगार (राहवीर) से पुलिस अनावश्यक सवाल-जवाब नहीं करेगी। सरकार ने स्पष्ट प्रावधान किया है कि घायल को अस्पताल लाने वाले व्यक्ति को न केवल सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उसे ‘सच्चा मददगार’ मानकर सम्मानित किया जाएगा।
डेढ़ लाख तक का मुफ्त इलाज और तत्काल भर्ती
स्वास्थ्य मंत्री ने योजना की बारीकियां साझा करते हुए बताया कि सरकार का लक्ष्य ‘अनमोल जिंदगियां’ बचाना है।
मुफ्त उपचार: हादसे के शिकार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचते ही 1.5 लाख रुपये तक का इलाज पूरी तरह मुफ्त दिया जाएगा।
हर अस्पताल में सुविधा: यह योजना सरकारी के साथ-साथ निजी और सरकारी उपक्रमों के अस्पतालों में भी लागू होगी। अस्पताल प्रबंधन को बिना किसी लंबी कागजी औपचारिकता के घायल को तुरंत भर्ती कर इलाज शुरू करना होगा।
“मैं हर नागरिक के स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार हूं”
भावुक अपील करते हुए श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा, “स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते प्रदेश के हर व्यक्ति की जान की कीमत मैं समझता हूं। सड़क पर किसी को असहाय छोड़ने के बजाय उसे अस्पताल पहुंचाएं। आपका एक छोटा सा कदम किसी का घर उजड़ने से बचा सकता है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि इस योजना के बाद समाज में मानवता को मजबूती मिलेगी और लोग बेखौफ होकर दूसरों की मदद करेंगे।
छत्तीसगढ़ सरकार की ‘राहवीर योजना’ उन हजारों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जो हर साल समय पर इलाज न मिलने के कारण दम तोड़ देते हैं। 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और पुलिसिया कार्रवाई से छूट, मददगारों के मन से झिझक को खत्म करने वाला कदम है। हालांकि, असली चुनौती निजी अस्पतालों में इस योजना को सख्ती से लागू करवाने की होगी, ताकि ‘गोल्डन ऑवर’ में किसी मरीज को पैसों या कागजों की कमी के कारण इलाज से महरूम न रहना पड़े।









